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नवमी तिथि : जानें नवमी से जुड़ी मान्यताएं और त्यौहार

नवमी तिथि : जानें नवमी से जुड़ी मान्यताएं और त्यौहार

पंचांग की नवमी तिथि चंद्र मास का नौवां दिन होता है। नवमी तिथि चंद्र मास के दोनों पक्षों में आती है। शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि और कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि। इस तिथि को विशेष रूप से कुछ कार्यों के लिए अनुकूल माना गया है तो कुछ काम इस दिन पर नहीं किए जाते हैं। नवमी तिथि के समय पर दुर्गा की पूजा करने का भी विधान रहा है। नवमी तिथि को रिक्ता तिथियों में स्थान प्राप्त है। इस तिथि को अनुकूल कम ही माना गया है और इस समय कामों में सफलता भी कम ही होती है।

नवमी तिथि के देवता

नवमी तिथि की स्वामिनी दुर्गा जी हैं, देवता के रूप में देवी दुर्गा का पूजन इस तिथि पर शुभदायी और विशेष प्रभाव देने वाला माना गया है। इस तिथि के दौरान नवमी के समय शुक्ल पक्ष की तिथि को शिव पूजा के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है लेकिन कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि का समय शिव पूजा के लिए शुभ माना जाता है। नवमी तिथि के दिन दुर्गा जी का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है तथा शक्ति एवं सिद्धियों को पाना संभव होता है।

नवमी तिथि के दिन किए जाने वाले काम

नवमी तिथि को कई कारणों से विशेष माना गया है क्योंकि इसे शुभ कामों के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार नवमी तिथि के दिन मुश्किल भरे काम और कठोर कर्म करने को अच्छा माना गया है। अगर व्यक्ति को किसी विशेष रूप से किसी कठोर काम में लड़ाई झगड़े वाद विवाद या युद्ध जैसी स्थिति में जीत हासिल करनी है तो इसके लिए नवमी तिथि को बहुत ही अनुकूल माना जाता है। कोर्ट केस की बात हो या फिर साहस से भरे काम करने के लिए इस तिथि को बहुत ही उपयुक्त माना गया है।

नवमी तिथि को क्रूर काम करने जैसे की शिकार करना, हमला करना हिंसक स्थिति को कंट्रोल करना, घातक हथियार बनाना, वाद विवाद में जीत हासिल करना ये सभी बातें अनुकूल मानी जाती हैं। इसके अलावा इस समय को जुआ, लॉटरी, सट्टे जैसे कामों के लिए अनुकूल माना गया है, चतुर्थी तिथि में किए जाने वाले काम भी इस तिथि के समय पर किए जा सकते हैं।

नवमी तिथि पर बनने वाले शुभ और अशुभ योग

नवमी तिथि के समय कई तरह के शुभ एवं अशुभ योगों का निर्माण भी होता है। इस तिथि के दौरान कुछ विशेष वार, नक्षत्र इत्यादि का होना इसे शुभ अथवा अशुभ प्रभाव देने वाला समय बना देता है।

नवमी के शुभ योग : नवमी तिथि के दिन शनिवार का पड़ना सिद्धिदा योग बनाता है। इस शुभ योग के प्रभाव से काम में सफलता प्राप्त होती है।

नवमी तिथि अशुभ योग : नवमी तिथि के दिन गुरुवार का दिन होने पर यह समय मृत्युदा नामक अशुभ योग बनाता है। इस समय किए जाने वाले कार्य असफलता को देने वाले होते हैं।

पक्ष रंध्र तिथि : नवमी तिथि को पक्ष रंध्र तिथि कहलाती है।

शून्य तिथि : चैत्र में की नवमी शून्य तिथि भी कहलाती है।

स्वयंसिद्ध तिथि : चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि।

मन्वादि तिथि : आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि मन्वादि कहलाती है। इस तिथि में जप, हवन, स्नान, दान, से संबंधित कार्य किए जाने अनुकूल होते हैं।

युगादि तिथि : कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि युगादि तिथि कहलाती है।

नवमी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति

नवमी तिथि के दिन जन्मा जातक कई विशेषताओं को प्राप्त करता है। जातक में अपने कार्यों के प्रति निष्ठा होती है और अपने काम के लिए जागरूकता भी होती है। धार्मिक दृष्टि से उदार होता है अपने इष्ट के प्रति भक्ति रखने वाला होता है। भौतिक सुख संपदा के प्रति आकर्षित होता है, विपरीत लिंग के प्रति इच्छुक एवं आर्थिक स्थिति को अनुकूल बनाने के लिए परिश्रम करने वाला होता है। महत्वाकांक्षी होता है और अपने जीवन में बड़े पद एवं सम्मान को पाने के लिए उत्साहित होता है।

जातक अपने काम में कुशल एवं निपुणता रखता है। अपने अनुसार स्थिति को बदल लेने वाला एवं बेहतर नीतियों को बनाने वाला होता है। कार्य कुशल और प्रगतिशील विचारों वाला होता है। अपने सगे संबंधियों के साथ स्नेह और प्रेम को दर्शाने वाला , परिवार के सुख के लिए मेहनती होता है। गुरुजनों एवं वरिष्ठ लोगों का सहयोग पाता है। साहस एवं शक्ति से संपन्न, मुश्किल एवं जटिल कामों को करने योग्य होता है। अपने अधिकार के प्रति सजग होता है। विजय प्राप्ति के लिए सदैव इच्छुक होता है।

नवमी तिथि के व्रत और त्योहार

नवमी तिथि के दिन कुछ विशेष व्रत त्योहार भी मनाए जाते हैं। इस समय को उपवास, व्रत, भजन कीर्तन, ध्यान साधना के लिए अनुकूल माना जाता है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को रामनवमी का उत्सव मनाया जाता है। अक्षय नवमी का व्रत आरोग्य को प्रदान करता है। सौभाग्य नवमी का व्रत सुख एवं समृद्धि को देने वाला होता है। भढली नवमी का पर्व अबूझ मुहूर्त का समय बन जाता है। महानवमी के रूप में दुर्गा पूजन शक्ति एवं शांति को प्रदान करने वाला होता है। इस तरह से हर माह की नवमी का अपना एक विशेष प्रभाव और महत्व जीवन पर पड़ता है।

ड़ॉ विनय बजरंगी के विषय में

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