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कैसे जानें अपने पिछले जन्म का कर्म | Jane Apne Pichle Janam Ke Karma

हम जीवन में अक्सर लोगों को कर्म की दुहाई देते हुए देखते हैं। यदि जीवन में कोई भी अनहोनी हो जाये तो उसका दोष हमारे कर्मों को दिया जाता है। यह साबित करता है कि कहीं न कहीं हम एक कर्म प्रधान समाज का हिस्सा है जहां कर्म को अत्यधिक महत्व दिया गया है। यह बात और है कि यहां अच्छे कर्मों पर चलने का भाषण तो हर कोई देता है पर कोई भी सद्कर्मों की राह पर चलने के लिए तैयार नहीं। खैर, हमारे धार्मिक ग्रंथों में भी कर्म व उनका हमारे जीवन में प्रभाव को भली–भाँती वर्णित किया गया है।
जानिए ज्योतिष क्या कहता है कर्मों के बारे में
ज्योतिष का मूल आधार आपकी जन्म कुंडली है। जन्म कुंडली के आधार पर ही जीवन की हर अच्छी या बुरी कर्मो/Karma Correction का अनुमान लगाया जाता है। लेकिन समझने वाली बात यह है कि क्यों नहीं सभी लोग जीवन में एक ही तरह के दुःख या सुख पाते? किसी को कोई दुःख है तो किसी को कोई। कोई किसी सुख का आनंद लेता है तो कोई किसी और सुख का। प्रत्यक्ष रूप से हमें कोई भी न्यायधीश नहीं नज़र आता जो हमारे कर्मों का हिसाब रखे, शायद वह कही आसमान में देवी–देवता के रूप में छुपे हो।
ऐसे में ज्योतिष, आकाश में घूम रहे ग्रहों को ही सबसे बड़ा न्यायधीश मानता है जो हमारे अच्छे बुरे कर्मों के फलस्वरूप हमें फल देते हैं। हम जीवन में जो कुछ भी पाते हैं वह हमारे पिछले जन्मों के कर्मों का ही परिणाम है। पर क्या कोई इस बात को साबित कर सकता है? जी हाँ, सर्वशक्तिमान ज्योतिष इस तथ्य को साबित कर सकता है।
कैसे जानें पिछले जन्म का कर्म
एक स्थान पर शान्ति से बैठ जाइए और अपने चारो ओर नज़र घुमा कर देखिये। क्या आपको जीवन में सुख की अनुभूति हो रही है? पैसे की चिंता को छोड़िये यह तो मनुष्य की सर्व व्यापक चिंता है! यदि आपके जीवन में घर–परिवार, अच्छे लोगों, मूलभूत आवशयकताएँ, संतान सुख, स्वास्थ्य आदि का सुख है तो निश्चित ही आपने पिछले जन्म में अच्छे कर्म किये हैं। अगर स्थिति इससे उलट है तो समझ जाइये आपने पिछले जन्म में क्या किया होगा।
पर क्या हमारी जन्म कुंडली/Janam Kundli यह इशारा दे सकती है कि हमने ऐसा क्या किया होगा जो हमें इस वर्तमान जीवन में यह स्थिति मिली? अनुभवी ज्योतिषी से मिलकर आप निश्चित ही अपने पिछले जनों के कर्मों का चिट्ठा जान सकते है। जिस समय आपने इस धरती पर जन्म लिया उस समय ग्रहों की क्या स्थिति थी, आपके पूर्व भाव के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देता है।
पूर्व जन्मों का संकेत देने वाले भाव
छठा भाव: छठा भाव आपके जीवन के संघर्ष को दर्शाता है। यह भाव रोग, ऋण व शत्रुता का भाव है। ये कषाय हैं जो हमें बार बार जीवन–मरण के चक्रव्यूह में फंसाते हैं। इस जन्म के शत्रु आपके पूर्व जन्मों के बैरी हैं जो आपका पीछा करते करते यहां तक पहुँच गए हैं। इसी तरह आपके पूर्व जन्मों का ऋण चुकाने ही आपने इस धरती पर पुनः जन्म लिया है। जब तक आप उसे चुकाएंगे नहीं, आप बारम्बार नरक, भूलोक और स्वर्गलोक की यात्रा करते रहेंगें। आपके रोग भी आपके शत्रु ही हैं। यहां पर जो भी राशि या ग्रह पड़ता है वह व्यक्ति को अपने नैसर्गिक गुणों के आधार पर संघर्ष देता है। यदि आपका ज्योतिषी इन संघर्षों की सही जानकारी आपको दे पाए तो आप कुछ पल भर में ही अपने जीवन को सही दिशा दे पाने में सफल हो जायेंगें।
आठवाँ भाव: यह कहलाता है मृत्यु भाव। आपकी मृत्यु कब, कैसे और कहाँ होगी, की जानकारी यह भाव आपको देता है। इसका लग्न से सम्बन्ध आपके पूर्व जन्मों के सम्बन्ध को दर्शाता है। यदि यह भाव एक अस्वाभाविक मृत्यु दर्शाता है तो निश्चित ही आप इस जन्म में अमान्य कार्य करेंगें। इस भाव में शुभ ग्रह एक शांत मृत्यु को दर्शाते हैं जो सत्कर्मों से ही प्राप्त होती है। यहां पर भी ग्रहों व राशि का आकलन बहुत महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है।
दसवां भाव: यह मुख्य कर्म भाव है, यह भाव हमारे कर्मों को दर्शाता है और कर्म हमारे मन व संस्कारों की देन है। दूसरा भाव हमारे संस्कार दिखता है और चन्द्रमा की स्थिति हमारे मन की स्थिति को दर्शाती है। यदि ये दोनों ही पीड़ित है तो निश्चित ही हमारा दसवां भाव/Tenth House भी पीड़ित होगा। यह अनेकों कुंडलियों में देखा जा चुका है। दसवें भाव में कोई अशुभ योग, अशुभ ग्रह व अशुभ युति हमें बुरे कर्मों की ओर अग्रसर करती है। इसका सीधा अर्थ यह है की हमने पिछले जन्मों में बुरे कर्मों/Past Life Karma का संचय किया है जो अब हमें बुरी मनः स्थिति व बुरे संस्कारों के रूप में भोगना पड़ेगा। यदि हम इस तथ्य को समझ कर अपने कर्मों की दिशा ठीक रखें तो हम इन कामों के चक्रव्यूह को सदा के लिए तोड़ सकते हैं।
पांचवा भाव: यह भाव पूर्व कर्मों का भाव है। यदि यह जानना हो कि पिछला जीवन कर्म वर्तमान जीवन को कैसे प्रभावित करता है/How Past Life Karma affects present life तो निश्चित ही पांचवा भाव आपको यह जानकारी दे सकता है। राहु और केतु की उपस्थिति कर्मों का दृण बंधन दर्शाती है जिसे तोड़ने के लिए अथक प्रयासों की ज़रुरत होगी। ज्योतिषीय उपाय और ग्रहों के अनुसार कर्मों का फेर बदल यहां आपकी 100% मदद कर सकती है। इस भाव पर शुभ दृष्टि या शुभ संयोग पिछले जन्मों के शुभ कर्मों को दर्शाता है। साथ ही साथ अशुभ संयोग पिछले कर्मों के बुरे कार्यों से हमारा परिचय करवाते हैं। ग्रहों व राशि के आधार पर यह सुनिश्चित किया जा सकता है की हमने पिछले जन्मों में ऐसा क्या किया होगा जिसके भयंकर परिणाम हम इस जन्म में भुगत रहे हैं। एक सुयोग्य ज्योतिषी की सहायता लीजिये।
पिछले जन्म के कर्म को कैसे ठीक करें
कर्मों को ठीक करना यूँ तो साधारण बात नहीं है क्यूंकि कर्मों की मानसिकता व कषाय के आधार पर ये कठोरता में अलग–अलग हो सकते हैं। लेकिन ज्योतिषीय उपाय/Jyotish Upay जो ग्रहों के गहन निरीक्षण के बाद सुझाये जाएँ, अवश्य ही व्यक्ति को दुष्कर्मों के प्रभाव से बाहर निकाल सकते हैं। इनमें रत्न, रुद्राक्ष/Rudraksha, दान, पूजा, व्रत, मंत्र जाप व कर्मों का रूपांतरण मुख्य हैं।
ड़ॉ विनय बजरंगी के विषय में
किसी को भी सिर्फ नाम के आधार पर ज्योतिषी नहीं माना जा सकता। हर व्यक्ति को जानना चाहिए कि एक अच्छे ज्योतिषी का चुनाव कैसे करें। सबसे अच्छा ज्योतिषी वही होता है जो केवल कर्म सिद्धांत पर रसम रिवाज और उपायों से अधिक विश्वास करता हो। अधिक पढ़ें...
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