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चैत्र नवरात्रि 2025 – दिन 6: माँ कात्यायनी की पूजा से प्रेम-विवाह और विवाह में विलंब की बाधा दूर करें

चैत्र नवरात्रि 2025 के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा का विशेष महत्व है। इन्हें शक्ति और प्रेम की देवी माना जाता है, जो भक्तों को प्रेम विवाह में सफलता और विवाह में आ रही बाधाओं से मुक्ति दिलाती हैं। सही विधि से पूजन करने पर शीघ्र विवाह के योग बनते हैं और वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। इस दिन विशेष मंत्रों, हवन और भोग अर्पण से माँ की कृपा प्राप्त की जा सकती है। जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसके चमत्कारी लाभ, जिससे आपका दांपत्य जीवन मंगलमय और सुखमय बन सके।
प्रश्न 1: चैत्र नवरात्रि का छठा दिन कब है और इस दिन कौन-सी देवी की पूजा की जाती है?
4 अप्रैल 2025 (शुक्रवार) को चैत्र नवरात्रि का छठा दिन है और इस दिन माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है। यह माँ दुर्गा का छठा रूप हैं, जिन्हें शक्ति, प्रेम और विवाह की देवी माना जाता है। देवी कात्यायनी ने महिषासुर का वध कर देवताओं को मुक्त किया था, इसलिए इन्हें नारी शक्ति और विजय की प्रतीक भी कहा जाता है।
प्रश्न 2: माँ कात्यायनी की पूजा आज के समय में क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है?
आज के युग में कई युवा:
- विवाह में बार-बार रुकावट,
- अच्छा रिश्ता न मिलना,
- या प्रेम विवाह में पारिवारिक विरोध जैसी समस्याओं से परेशान हैं।
माँ कात्यायनी की पूजा से इन सभी समस्याओं में राहत मिलती है। ये देवी विशेष रूप से उन कन्याओं की आराध्य हैं जो सही जीवनसाथी की कामना करती हैं।
प्रश्न 3: क्या माँ कात्यायनी की पूजा से प्रेम विवाह की बाधा भी दूर हो सकती है?
जी हाँ। माँ कात्यायनी को प्रेम और विवाह की देवी कहा गया है।
भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए गोपियों ने कात्यायनी व्रत किया था, यह कथा स्कंद पुराण में प्रसिद्ध है।
आज भी जिन युवाओं को:
- प्रेम विवाह में अड़चन हो रही हो,
- माता-पिता का विरोध झेलना पड़ रहा हो,
- या सही जीवनसाथी न मिल रहा हो,
उन्हें माँ कात्यायनी की पूजा अत्यंत फलदायी होती है।
प्रश्न 4: माँ कात्यायनी की पूजा विधि क्या है?
- प्रातःकाल स्नान कर गुलाबी या पीले वस्त्र पहनें।
- माँ की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाएं।
- माँ को गुलाब, केले, और मिश्री अर्पित करें।
- “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः” मंत्र का जाप 108 बार करें।
- माँ से विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें।
- अंत में माँ की आरती करें।
प्रश्न 5: माँ कात्यायनी का ज्योतिषीय संबंध किस ग्रह से है?
माँ कात्यायनी का संबंध गुरु (बृहस्पति) ग्रह से है। गुरु विवाह, जीवनसाथी, शुभ संयोग और धर्म का प्रतीक है।
यदि किसी की कुंडली में गुरु कमजोर या पीड़ित हो तो:
- विवाह में देरी,
- जीवनसाथी से असंतोष,
- या गुरु दोष के कारण रिश्ते बिगड़ने की संभावना होती है।
- माँ कात्यायनी की पूजा से गुरु ग्रह की शुद्धि होती है और विवाह मार्ग सुगम बनता है।
प्रश्न 6: क्या कन्याओं को विशेष रूप से इस दिन व्रत रखना चाहिए?
हाँ, विशेष रूप से अविवाहित कन्याओं को यह व्रत रखना चाहिए।
यह “कात्यायनी व्रत” कहलाता है और इसके प्रभाव से:
- अच्छे गुणों वाला जीवनसाथी मिलता है,
- विवाह में चल रही अज्ञात बाधाएँ दूर होती हैं,
- और प्रेम संबंधों में स्थायित्व आता है।
प्रश्न 7: क्या इस दिन गुरु दोष के लिए कोई विशेष उपाय किया जा सकता है?
जरूर। इस दिन आप ये उपाय करें:
- “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” का जाप करें।
- पीले कपड़े, चना दाल और केले का दान करें।
- किसी कन्या को पीले वस्त्र या मिठाई भेंट करें।
- पीपल के वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाएं।
प्रश्न 8: माँ कात्यायनी की पूजा से क्या-क्या लाभ मिलते हैं?
- विवाह में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं
- प्रेम विवाह में पारिवारिक सहमति बनती है
- गुरु दोष का शमन होता है
- स्त्रियों को आत्मबल और सामाजिक सुरक्षा मिलती है
- विवाह योग्य युवाओं को योग्य साथी की प्राप्ति होती है
यदि आप भी विवाह में देरी, प्रेम संबंधों में अस्थिरता या गुरु दोष जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो माँ कात्यायनी की पूजा आपके लिए समाधान बन सकती है।
कुंडली में विवाह योग, गुरु दोष और प्रेम विवाह में सफलता के उपाय जानने के लिए संपर्क करें: Dr. Vinay Bajrangi
ड़ॉ विनय बजरंगी के विषय में
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