आखिर क्यों नहीं लगता पढ़ाई में मन... क्या करें

    आखिर क्यों नहीं लगता पढ़ाई में मन...  क्या करें

हर माता पिता चाहता है कि उनके बच्चे पढ लिखकर अपने पैरों पर खडे हों और कामयाबी ​हासिल करें ! क्योंकि किसी भी बच्चे का भविष्य उसकी अच्छी शिक्षा पर निर्भर करता है ! क्योंकि अच्छी शिक्षा दीक्षा मिले तो अवश्य ही आगे चलकर उसे अपने जीवन में कामयाबी जरूर मिलेगी ! अच्छी शिक्षा मिलेगी तो वे पढकर अच्छा मुकाम हासिल कर पाएगा और इसी पर उसका जीवन स्तर निर्भर करता है ! माता पिता भी अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा दीक्षा देने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं और अपने बच्चों को अच्छे से अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाते हैं ! बच्चों को कोई परेशानी न आए इसके लिए खुद भले ही आर्थिक तौर पर परेशान हो जाएं , लेकिन बच्चों की पढाई लिखाई में किसी तरह की कोई कमी नहीं आने देते ! लेकिन कई बार माता पिता की इतनी कोशिशों के बावजूद भी बच्चा अपने माता पिता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाता ! हालांकि अपने माता पिता की उम्मीदों पर पूरा उतरने के लिए वो हर कोशिश करता है ! लेकिन उसके हाथ सिवाय नाकामी के कुछ नहीं आता ! आखिर ऐसी कौन सी वजहें हैं माता पिता की ओर से हर सुविधा मुहैया कराने के बावजूद बच्चा पढाई में कमजोर रहता है और उसे नाकामी ही मिलती है ! आज हम आपको कुछ ऐसा ही कुछ कारणों के बारे में बताएंगे और ये जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर कौन से ऐसे कारण हैं कि आपका बच्चा पढाई में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहा !विद्यार्थी जीवन की भी कई समस्याएं होती हैं,आपका बच्चा पढने बैठता है लेकिन उसका पढाई में मन नहीं लगता पढने बैठता है तो ध्यान एकाग्र नहीं कर पाता ,स्मरण शक्ति कम होना ,अध्ययनेतर गतिविधियों में अधिक लिप्त रहना ,आत्मविश्वास की कमी होना ,मेहनत करने पर भी अनुकूल परिणाम हासिल न होना , आप या फिर आपकी संतान ऐसी किसी भी समस्या से परेशान हैं !तो ऐसी स्थिति में ज्योतिष आपके लिए एक अच्छे सहायक का काम कर सकते है! किसी व्यक्ति के स्वभाव ,उसकी शिक्षा,उसके भावी जीवन इत्यादि का निर्णय उसकी जन्म पत्रिका देखकर किया जा सकता है! यहां  मैं विनय बजरंगी  आपको बताता हूं कि मुताबिक क्या कारण है कि विद्यार्थी शिक्षा में  अपना मन क्यों नहीं लगा पाता।

   शिक्षा के लिए जन्मकुंडली में पंचम भाव,पंचमेश,द्वितीय भाव,गुरु एंव बुध इनका मुख्य रूप से विचार करना चाहिए ! अगर इन में से अधिकतर की स्थिति ठीक नहीं है अर्थात नीच,अस्तगत,शत्रु्गतया पापकर्तरीगत है तो प्राय : ऐसे विद्यार्थियों का अध्ययन में मन नहीं लगता ​है! बहुत प्रयास करने के बावजूद वे एक सीमा तक ही अध्ययन कर पाते हैं !

  लग्न से जातक की प्रकृति ,उसके स्वभाव एंव आचार विचार का पता लगाया जा सकता  है ! यदि शनि का लग्नेश या लग्न पर प्रभाव हो व राहु की भी लग्न या लग्नेश पर दृष्टि हो तो प्राय: ऐसे विद्यार्थी अधिक आलसी होते हैं ! सुबह उठकर पढना उन्हें बिल्कुल अच्छा नहीं लगता !पढते समय उन्हें अध्ययन के वक्त ही नींद आ जाती है!

अध्ययनकाल के दौरान यदि शनि या राहु की अंर्तदशा चल रही हो तो एवं जन्मपत्रिका में भी में भी इसकी स्थितियां अनुकूल नहीं हों ,शुक्र ,मंगल की युति जन्मकुंडली में हो,राहु मंगल का संबंध लग्न अथवा पंचम भाव में बन रहा हो ,तो ऐसे जातक अध्ययन काल में ही अध्ययन की अपेक्षा आसामाजिक एंव अनैतिक गतिविधियों में अधिक संलग्न रहते हैं! पढाई इनके लिए दूसरे नंबर का कार्य होता है! अध्ययन के दौरान यदि साढेसती अथवा ढैया चल रही हरे ,राहु मंगल या शुक्र मंगल की युति लग्न,पंचम या ग्यारहवें भाव में हो तो ऐसे जातक प्राय: कुसंगति में पढकर अध्ययन में ध्यान नहीं दे पाते ! ये भी देखा गया है कि कुशाग्र बुद्धि से युक्त होने पर भी कुसंगति में पढकर पढाई से भागने लगते हैं!

द्वितीय भाव में या लग्न में राहु या शनि स्थित हो और चंद्रमा भी राहू या शनि या केतू के साथ स्थित हों साथ ही पंचमेश एंव लग्नेश भी पाप प्रमाद में हो तो विद्यार्थियों को अध्ययनकाल में सिगरेट,गुटका या फिर अन्य दुव्र्यसन शीघ्र अपनी ओर खींच लेते हैं ! इसके अतिरिक्त शुक्र यदि अधिक बली हो ,चंद्रमा या मंगल से संबंध बनाए ,मंगल पंचम या तृतीय भाव में स्थित हो एंव बुध गुरु निर्बल हो तो ऐसे विद्यार्थी अध्ययनकाल में ही फिल्म देखने अैर घूमने फिरने में अपना समय गंवा देते हैं! वे अपना समय बर्बाद करते हैं और पढाई में इनका मन नहीं लगता ! लग्न में लग्नेश लग्न में लग्नेश चर या द्विस्वभाव राशि में हो और शनि या राहु लग्न में को गंभीरता से नहीं लेते हैं! और परीक्षा के दिनों में ही पढकर परीक्षा पास करना इनकी फितरत होती है!

        जन्मकुंडली में गुरु यदि नीच राशिगत हो निर्बल हो या पाप प्रभाव में हो एंव लग्नेश की भी ऐसी ही स्थिति हो तो विद्यार्थी निंस्संदेह अध्ययन करता है! अर्थात उसमें स्थित हों तो ऐसे विद्यार्थी प्राय: अध्ययन के प्रति लापरवाह होते हैं! अध्ययन कार्य दूरदर्शिता की कमी होती है वह अध्ययन तो करता है लेकिन अध्ययन से संबंधित उदेश्यों या लक्ष्यों का निर्धारण वह नहीं करता है ! भाग्य जहां उसे ले जाता है वहीं पर वो चला जाता है! शुक्र और चंद्रमा यदि त्रिक भावगत हो ,नीच राशिगत हो या पाप प्रभाव में हो एंव मंगल की अपेक्षा

शनि अधिक बली हो तो ऐसे विद्यार्थी व्यवस्थित ढंग से न तो रहते हैं और न ही अध्ययन करते हैं ! उनका अध्ययन कक्ष प्राय: अस्त व्यस्त ही रहता है! अध्ययन का कोई निश्चित समय नहीं होता !

    आप भी इस महत्वपूर्ण जानकारी को प्राप्त् कर ये जान सकते हैं कि आखिर आपका बच्चा सारी सुविधाएं मिलने के बावजूद पढाई में अपना प्रदर्शन बेहतर क्यों नहीं कर पा रहा !

कुछ मिनट की ज्योतिष सलाह आपके बच्चे को सही रास्ता दिखा कर उसका जीवन सुधार कर आपको शांति दे सकती है !!. तो विलम्ब करें !

 

Comment & Reviews

P Krishna Moorthy 2017-09-07
Could you please , expliin it in english too, as the content is nice but my understanding of the hindi language is limited. Thanks
User Name:P Krishna Moorthy
WRITE A REVIEW (SYSTEMATIC POMOLOGY (VOL...) PLEASE LOGIN!   Login