ऊपरी हवाओं से कैसे बचें...

ऊपरी हवाओं से कैसे बचें...

कई बार हम जिस जगह पर रहते हैं वो जगह देखने में तो बेहद आकर्षक होती है। लेकिन आप सिर्फ उस जगह की खूबसूरती पर ही न जाएं। खूबसूरत जगह होने के बाद  भी उसमें कुछ खामियां हो सकती हैं। जिसे हम पहचान नहीं पाते और यही खामियां हमारे जीवन को अस्त-व्यस्त करके रख देती हैं।जिसके कारण हम में और बच्चों में डर और भय की स्थिति बन जाती है। उस जगह में ऐसी कई अदृश्य शक्तियां होती हैं जो आम व्यक्ति के जीवन में कई बाधाएं खड़ी कर देती हैं।आईए मैं विनय बजरंगी आपको बताता हूं कि ज्योतिष ज्ञान से  जीवन में घटित होने वाली शक्तियों का कैसे पता लगाया जा सकता है।

अगर लग्न में राहु, चंद्र और त्रिकोण में मंगल और शनि हो तो व्यक्ति को प्रेत बाधाएं परेशान करती हैं।

अगर चंद्र पाप ग्रह से दृष्ट हो, शनि सप्तम भाव में हों और कोई शुभ ग्रह चर राशि में हो तो भूत से पीड़ा भी होती है।

अगर शनि और राहु लग्न में हो तो जातक को भूत सताते हैं।

गणेश या चंद्र से युक्त राहु, लग्न में हो तो प्रेत का योग होता है।

अगर दशम भाव का स्वामी आठवें या एकादश भाव में हो और संबंधित भाव के स्वामी दृष्ट हो तो उस स्थिति में प्रेत का योग होता।

ऊपरी हवाओं के प्रभाव में आने के कारण मानव शरीर के अलावा व्यवहार में कई परिवर्तन आने लगते हैं।    

अगर आप इस समस्या से निजात चाहते है तो पान, फूल, हल्दी, फल और इलायची के हवन से दुर्गासपत्शती के बारहवें अध्याय के तेरहवें श्लोक सर्वबाधा व संशय मंत्र से संपुटित नवचंडी का प्रयोग कराएं।

अगर आप सफलता हासिल करना चाहते हैं तो इसके लिए ग्यारहवें अध्याय के ग्यारहवें श्लोक का उच्चारण करते हुए हवन करें।

अगर आप अपने जीवन में आने वाली मुश्किलों से हताश है तो इसके लिए दुर्गा सप्तशमी के चौथे अध्याय के चौबीसवें श्लोक का पाठ करें।

ऐसे स्थान पर आप  महामृत्युंजय मंत्र का विधिवत अनुष्ठान कराकर हवन कराएं।

महाकाली या भद्रकाली का अनुष्ठान भी करा सकते हैं।

हमेशा हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करें।

अगर घर में छोटे बच्चे ऊपरी हवा से परेशान है या पीड़ित हैं तो मोर के पंख को जलाकर उसकी राख का बच्चे को तिलक लगाएं।

इन प्रयासों को आप अपने जीवन में अपना कर इस समस्या से निजात पा सकते हैं .

जय बजरंग बली !!!

Also explained in ENGLISH as below. 

How to be protected from Spirits...

Many times we really admire and hugely like the place where we stay but we must pay attention to details beyond its superficiality. There may be many shortcomings attached to that place which we are not able to recognize. More often than not, these flaws of a place ruin our lives. Our kids and we get scared and remain in the state of unrest at such places. There are many invisible forces which creates huge obstacles in our lives. I, Vinay Bajrangi will tell you how astrology science identifies such forces and their related events.

If your ‘Lagna’ has the presence of ‘Rahu’ and ‘Chandrama’ and the presence of ‘Mars’ and ‘Saturn’ in triangle then such people are often troubled by spirits.

If ‘Chandrama’ is affected by sinful planetary effect, ‘Saturn’ is placed in seventh house and if any auspicious planet is placed in ‘Cher Rashi’ then such people are haunted by the presence of ghosts.

If ‘Saturn’ and ‘Rahu’ are placed in one’s ‘Lagna’, then such persons are also troubled by spirits.

Rahu saturated with ‘Ganesha’ or ‘Chandra’, is placed in one’s Lagna, then such person is also troubled by spirits.

If the master of ‘Dasham Bhav’ is misplaced at ‘Eighth’ or ‘Ekadash’ Bhav and it is dominating the related bhav, then the ‘Jatak’ has presence of ghosts and spirits in his life.

Contact of spirits not only brings physical changes in human beings but they have huge behavioural changes as well.

If you want to get rid of this predicament then offer betel leaves, flowers, turmeric, fruits and cardamom in ‘Havan’  and offer thirteenth Shloka of ‘Sarvbadha and Sanshay Mantra’ in prayers from twelveth chapter of Durgasaptshi encapsulated with the usage of ‘Navchandi.’

If you want to succeed then offer eleventh shloka from the eleventh chapter of Durgasaptshi and perform ‘Havan’ reciting this.

If you are disappointed with facing obstacles in your life then recite twenty fourth Shloka from the fourth chapter of Durgasaptshi.

You must ritualise such places with ‘Mahamratunjay’ in full process and conclude it with Havan.

You may ritualise ‘Mahakali’ or ‘Bhadrakali’ too.

Always recite ‘Hanuman Chalisa’ and ‘Bajrang Ban’ at such a place.

If kids are troubled or affected by the presence of spirits, then burn a peacock feather and put a garland on kid’s forehead with this ash.

You can easily be relieved from the haunting and troubles of spirits by following these simple solutions.

Jai Bajrangbali !  

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