क्यों हुए चन्द्रमा शापित

 क्यों हुए चन्द्रमा शापित

एक बार भगवन गणेश जी रात्रि में भर्मण कर रहे थे तभी चन्द्रमा के पास से गुजरे जो अति रूपवान है|  अपने रूप पर उनको इतना घमंड था कि उन्होंने गणेश जी के रूप और आकार को देख कर गणेश जी का उपहास किया इस पर गणेश जी क्रोधित हुए और चन्द्रमा को श्राप दे डाला कि तुम्हे अपने कर्मो का फल भुगतना होगा| जिस रूप - रंग पर तुम्हें  इतना अहंकार है, वह नष्ट हो जायेगा, और तुम्हारे दर्शन करने वाले मनुष्य को भी अपमान , कलंक, निंदा, और अनिष्ट का भागीदार बनना पड़ेगा | और वो भी मेरे श्राप से प्रभावित होंगे | गणेश जी द्वारा दिए गए  इस भयंकर श्राप को सुनकर चन्द्रमा का मुँह अत्यंत कुरूप और भयावर हो गया, जिस कारण वह काफी डर गए और जा कर जल के अंदर श्वेतकमल में छुप कर रहने लगे| यह जानकर सभी देवतागण बहुत दुःखी हुए| तब ब्रह्मा जी, इन्द्र देव और अग्नि देव ने मिलकर चन्द्रमा को उपाय सुझाया कि चतुर्थी के दिन, वह गणेश जी की पूजा करें | उन्हें फल, मोदक, का प्रसाद चढाने के लिए कहा जो कि उन्हें बहुत प्रिये है |अब चन्द्रमा देवो द्वारा बताए गए गणेश व्रत को करने लगे |अंततः  गणेश जी प्रसन्न हो गए और चन्द्रमा से वरदान मांगने को कहा | तब चन्द्रमा ने कहा प्रभु ऐसा वरदान दे कि अपने पाप और श्राप से निवृत हो जाऊ तथा मनुष्य फिर मेरे दर्शन कर सुखमय हो | गणेश जी ने  पहले तो वरदान देने से इंकार कर दिया लेकिन देवगणों की प्रार्थना सुन गणेश जी बोले : जाओ शशांक (चन्द्रमा ) मैने तुम्हे अपने श्राप से मुक्त किया | लेकिन इस श्राप का अंश तुम पर रहेगा , जो भी शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को तुम्हारे दर्शन करेगा उसे मिथ्या विवाद , कष्टो से  गुजरना होगा यदि उस दिन पहले मेरे दर्शन के बाद तुम्हारा दर्शन करता है तो उसे कोई दोष नहीं लगेगा |

कहते है एक बार श्री कृष्ण ने अनजाने में ही, भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का चाँद देख लिया था , जिसकी वजह से उन्हें जीवनभर चोरी के कलंक का सामना करना पड़ा था |

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