SKANDAMATA GRANTS BOON

skandamata VINAY BAJRANGI

स्कंदमाता 
पंचम नवरात्रि को स्कंदमाता की पूजा की जाती हैं | 
वंदना मन्त्र 
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
नव दुर्गा पूजन के पांचवे दिन माँ दुर्गा के पांचवे स्वरूप - स्कंदमाता की उपासना करनी चाहिए |  इस दिन साधक का मन 'विशुद्ध' चक्र में अवस्थित होता है | स्कंदमाता का ध्यान करने से साधक, इस भव सागर के दुःखों से मुक्त होकर, मोक्ष को प्राप्त करता है |
 उपयुक्त मन्त्र  का जाप शुद्ध उच्चारण क्रिस्टल की माला से 108  बार करे |  फिर दुर्गा जी की आरती कर के स्कंदमाता का ताम्बे का चित्र बीसा यंत्रयुक्त, देवी भक्तों में वितरण करें, तो अधिक लाभ प्राप्त होता हैं |

अपने भक्तो की समस्त इक्छाओ  को सम्पूर्ण करने वाली होती हैं स्कंदमाता | यदि माँ आपसे  प्रसन्न  हो जाए तो मोक्ष का द्वार खुल जाता   है, और आप परम सुख का अनुभव करते हैं |
नवरात्र  के पांचवें  दिन स्कंदमाता की उपासना करने का विधान होता है | पुराणों में स्कंदमाता को कुमार और शक्ति कहकर  महिमा मंडित किया गया है | स्कंद की माता होने के कारण माँ दुर्गा के इस स्वरूप को  स्कंदमाता के नाम से जाना जाता  हैं | इनकी चार भुजायें  होती हैं | इनकी एक भुजा में कमल पुष्प होता है तो दूसरी भुजा में वरमुद्र होती हैं | बायीं  तरफ वाली भुजा में एक और कमल पुष्प होता है | और इनका वर्ण पूर्णतः शुभ्र है | इनका आसान कमल का होता है और इसी कारण से इनको पद्मासन देवी भी कहा जाता हैं | इनका वाहन भी सिंह होता हैं |

इनकी  साधना करने वाले साधको का समस्त  मन सांसारिक बंधनो से विमुक्त होकर पद्मासन में  लीन होता हैं | इस समय साधक को सावधानी के साथ पूजा इत्यादि करनी चाहिए , और आपने  ध्यान को एकाग्र रखते हुए साधना के पथ पर आगे बढ़ते रहने चाहिए | 

स्कंदमाता और ज्योतिष 
स्कन्द माता की उपसना  करने से भक्त  की सभी  इक्छाओ की पूर्ति हो जाती हैं , और इस मृत्यु लोक में शांति  और सुख का अनुभव होने लगता हैं | आपकी कुंडली के अंदर ये तृतीय और नवम भाव में  स्थित होती हैं | यदि  इन भाव  को बलिष्ठ करना हो तो स्कंदमाता की पूजा करना अत्यंत आवश्यक होता हैं | 
तृतीय भाव नये- नये अवसरों को पैदा करता हैं | और नवम भाव भाग्य के द्वार खोल देता हैं | जब इन भावों के साथ व्यक्ति इस मृत्यु लोक पर सुख शांति अनुभव करता हैं, तो उसका दद्वादश  भाव भी खुल जाता हैं | जो मोक्ष द्वार के नाम से भी जाना जाता हैं |