MAHAGAURI MENDS YOUR ILL LUCK

mahagauri VINAY BAJRANGI

महागौरी 
अष्ठम नवरात्रि को महागौरी माता की पूजा की जाती हैं | 
वंदना मन्त्र 
श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।
 नव दुर्गा पूजन के आठवें दिन माँ दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी माता की उपासना करनी चाहिए | महागौरी माता का ध्यान करने वाले साधक के लिए असंभव कार्य भी संभव हो जाता हैं | 
उपयुक्त मन्त्र  का जाप शुद्ध उच्चारण क्रिस्टल की एक  माला से 108  बार करे |  फिर दुर्गा जी की आरती कर के, महागौरी   माता का ताम्बे का  चित्रयुक्त  बीसा यंत्रयुक्त, देवी भक्तों में वितरण करें, तो अधिक लाभ प्राप्त होता हैं |


माँ दुर्गा का आठवां रूप महागौरी, यह नवदुर्गो में  आठवें क्रम पर आती हैं  और इसी कारण से इनकी आराधना नवरात्रि के अष्ठम दिन की जाती हैं | 
जो महागौरी की आराधना करता हैं वें अपने तमाम दुखों से दूर हो जाता हैं | महागौरी की चार भुजाएं होती हैं | जिसमे से दो भुजाओं में उनके शस्त्र होते हैं | और दो भुजाएं आशीर्वाद देती हुई  प्रतीत होते हैं | इनका वर्ण सफेद हैं | और देखने में अत्तयंत सुन्दर हैं,और इसी लिए इनका नाम महागौरी हैं |  इनकी सवारी एक सफ़ेद बैल हैं | और इनके वस्त्र हरपल सफ़ेद रहते हैं | 


काली माँ  ने अपने आवरण को गौण करने के लिए या सफ़ेद करने ले लिए उन्होंने काफी आराधना की और ब्रह्मा जी के आदेश से उन्होंने मानसरोवर झील में  स्नान किया | ताकि उनकी जो ये  काली काया थी  वे उन से अलग हो जाये | और वह  एक गौण आवरण उनको प्राप्त हो | 


काली का ऐसा  करने से उनकी  पुनरावृति  महागौरी के नाम के रूप में हुई | महागौरी का सम्बन्ध माँ गंगा से हैं | जो मनुष्य  के सारे  के सारे मैल को साफ करने की क्षमता रखती हैं |

महागौरी का ज्योतिष सम्बन्ध 

महागौरी की आराधना करने से व्यक्ति  का द्वादश भाव व द्वादेश बलिष्ट होते हैं, और मोक्ष प्राप्ति  के कारक बनते हैं | साथ - साथ भाग्य भी प्रबल होता हैं|  जिन्हें  ऐसा प्रतीत होता हो की कुंडली  का नवम भाव और द्वादश भाव बलहीन हैं , तो महागौरी की आराधना करके उसे बलिष्ठ कर सकते हैं |