MAA KUSHMANDA YOUR DIVINE HEALER

kushmanda VINAY BAJRANGI

कुष्मांडा 
चतुर्थ नव रात्रि को कुष्मांडा माता की पूजा की जाती है |
वंदना मंत्र 
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
नव दुर्गा पूजन के चौथे दिन माँ दुर्गा के दुर्गा के चौथे स्वरुप कुष्मांडा की उपासना की जाती है |इस दिन साधक का मन अदाहत  चक्र में अवस्थित होता है कूष्मांडा देवी का ध्यान करने से अपनी लौकिक - पारलौकिक उन्नति चाहने वालों पर इनकी विशेष कृपा होती है | उपयुक्त मन्त्र  का जाप शुद्ध उच्चारणपूर्वक क्रिस्टल की माला से 108  बार करे | फिर दुर्गा माँ की आरती कर कूष्मांडा माता के ताम्बे का चित्रयुक्त बीसा यंत्र देवी भक्तो में वितरण करें  | तो और  भी अधिक लाभ प्राप्त होता है | 


जातक को नवरात्रो के चौथे दिन माँ कुष्मांडा की पूजा करनी चाहिए  इस दिन उसे अपना मन बहुत पवित्र और बिना चंचलता के रखना चाहिए तभी पूजा और उपासना का फल उसे प्राप्त होता है |
इस दिन साधक का मन अदाहत  चक्र में होता हैं इन्ही देवी ने ब्रमांड की रचना की हैं | इसलिए ये श्रष्टि की  आदि  स्वरूपा या आदि शक्ति होती हैं इनका निवास सूर्य  मंडल के भीतर के लोक में  होता हैं | और सिर्फ इन्हें ही  वहां  पर निवास करने की शक्ति एवं सामर्थ्य  होता हैं | इनकी  कांति और आभा सूर्य के सामान ही  होती  हैं  और इनका तेज़ प्रकाश दसो दिशाओ में प्रकाशित होता हैं | 
माँ कि आठ भुजाएं होती हैं  | इसलिए इन्हे अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता हैं | इनके सात हाथो में कमण्डल , धनुष , बाण, कमलपुष्प , अमृतचूर्ण, कलश चक्र, एवं गदा विराजमान होता हैं | आठवे हाथ में सभी सिद्धियां और निधियां देने की जप माला होती हैं | इनका वाहन सिंह हैं | 


माँ कूष्मांडा  का ज्योत्षिय सम्बन्ध 
इनकी उपासना करने से भक्तो के समस्त रोग शोक मिट जाते हैं और सबसे बड़ी बात ये हैं कि आयु में वृद्धि होती है |  
यह अल्पसमय में ही प्रसन्न  होने वाली देवी हैं | इसका तातपर्य यह हुआ कि यदि मनुष्य सच्चे मन से इनकी शरण में जाये तो यह अत्यंत सुगमता से परमपद को देने का वरदान दे देती हैं | एक और बात, इनके विषय में वो यह है कि यदि साधक इनकी पूजा करता हैं तो उसको बहुत जल्दी या शीघ्रता से ही इनकी कृपा का सूक्ष्म अनुभव प्राप्त होने लगता हैं | यह आपकी  कुंडली के छठे भाव , अष्टम भाव , और द्वाद्श भाव , यानि के सारे त्रिक  भाव हैं या ख़राब भाव हैं उन पर आसीन रहती हैं |  यदि इनकी अधिषाष्टि देवी इन भावो कि अधिषाष्टि देवी  प्रसन्न हो जाये तो आपको कभी भी छह, आठ,बारह भावो का शोक या दुःख परेशानी प्राप्त नहीं होगी तो नवरात्रो के चौथे दिन तो इनकी पूजा करनी ही चाहिए लेकिन साधक को पुरे वर्ष इनकी चिंता में मगन रहना चाहिए और इनके ध्यान में मगन रहना चाहिए |