HAPPY NAVRATRI

DR. VINAY BAJRANGI

चैत्र नवरात्रि इस वर्ष 18 मार्च 2018 से शुरू होगी |

भारत में नवरात्रि का पर्व बड़े ही धूम - धाम से मनाया जाता हैं | नवरात्रि वर्ष में दो बार मनाया जाता हैं | क्या आप ये जानते हैं की नवरात्रि क्यों मनाया जाता हैं | किसके पीछे कौन सी कथा हैं | आईये मैं डॉ. विनय बजरंगी आपको चैत्र नवरात्रि से जुड़ी प्रसिद्ध कथा के बारे में बताता हूँ |   

चैत्र नवरात्रि से जुड़ी रामायण की प्रसिद्ध कथा :-

चैत्र नवरात्रि से जुड़ी एक कथा के अनुसार लंका युद्ध में ब्रह्मा जी ने श्री राम से रावण वध के लिए चंडी देवी का पूजन कर माता को प्रसन्न करने  को कहा और विधि - विधान के अनुसार चंडी पूजन और हवन के लिए दुर्लभ 108  नीलकमल की व्यवस्था भी कर दी | वही दूसरी और रावण ने भी अमरत्व प्राप्ति के लिए चंडी देवी को प्रसन्न करने के लिए चंडी पाठ प्रारम्भ का दिया | रावण के द्वारा चंडी पाठ प्रारम्भ करने की बात इंद्र देव ने पवन के माध्यम से श्री राम तक पहुंचाई |

इधर रावण को जब यह पता चला कि श्री राम के द्वारा चंडी देवी को प्रसन्न करने के लिए 108  नीलकमल माता को चढ़ाये जा रहे है तो रावण ने मायावी तरीके से पूजास्थल पर हवन सामग्री में से एक नीलकमल गायब करा दिया, जिससे श्री राम की पूजा बाधित हो जाए | जब 108  नीलकमल में से एक नीलकमल कम पाया गया तो श्री राम का संकल्प टूटता नज़र आया | सभी में इस बात का भय व्याप्त हो गया कि कहीं माँ दुर्गा कुपित न हो जाए | तभी श्री राम को याद आया कि उन्हें कमलनयन नवकंज लोचन भी कहा जाता हैं, तो क्यों न एक नेत्र को माँ की पूजा में समर्पित कर दें | श्री राम ने जैसे ही तूणीर से अपने नेत्र को निकालना चाहा तभी माँ दुर्गा प्रकट हुई और कहा कि वह पूजा से प्रसन्न हुई और उन्हें विजयश्री का आशीर्वाद दिया |

दूसरी तरफ रावण की पूजा के समय हनुमान जी ब्राह्मण बालक का रूप धारण कर रावण के पूजा में शामिल हो गए | और जहाँ ब्राह्मणों के द्वारा पूजा की जा रही थी उसमे एक श्लोक (जयादेवी...भूर्तिहरिणी...) में हरिणी के स्थान पर हनुमान जी ने करिणी उच्चारित करा दिया | हरिणी का अर्थ होता हैं भक्त की पीड़ा हरने वाली और करिणी का अर्थ होता हैं पीड़ा देने वाली | इससे रावण की पूजा खंडित हो गई और माँ दुर्गा रावण पर क्रोधित हुई और रावण को श्राप दे दिया | रावण का सर्वनाश हो गया |

इसी सत्य और धर्म की विजय के रूप में चैत्र नवरात्रि मनाया जाता हैं |

किसी भी पूजा को करने का अर्थ क्या होता है :-

पूजा का अर्थ है, चित्र को देखकर उसके चरित्र को अपने जीवन में उतारना |

अर्थात जब आप माँ दुर्गा की पूजा अर्चना करें तो उनके चरित्र के कुछ गुण अपने अन्दर उतारें |

जय बजरंग बली की