HAPPY HOLI

DR. VINAY BAJRANGI

इस वर्ष होली 2 मार्च 2018 को मनाई जाएगी |

होली भारत के महत्व त्योहारों  में से एक हैं | होली फाल्गुन महीनें में पूर्णमासी के दिन मनाया जाता हैं | होली मनानें के पीछे भी एक बहुत ही महत्व पूर्ण कथा हैं, जिसके कारण लोग बहुत ही हर्षोउल्लास से होली का त्योहार मनाते हैं |

एक हिरण्यकश्यप नाम का राजा था, जो बहुत ही क्रूर था और वह खुद को भगवान मानता था | उसे लगता था, इस संसार में उससे शक्तिशाली कोई नहीं हैं | वह देवताओं से घृणा करता था | वह अपनी प्रजा को भी भगवान की नाम लेने मात्र से भी उसे दण्डित करता था | हिरण्यकश्यप का एक पुत्र था जिसका नाम प्रह्लाद था | वह भगवान विष्णु का बहुत ही बड़ा भगत था परन्तु यह बात हिरण्यकश्यप को बिल्कुल भी पसंद नहीं था कि उसका पुत्र भगवान की भक्ति करें | वह अपने पुत्र को भगवान विष्णु का नाम तक नहीं लेने देता था और उसे हमेशा डराता रहता था | और कई बार तो उसने अपने पुत्र को दण्डित भी किया परन्तु प्रह्लाद ने अपने पिता की एक न सुनी और वह भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहता था | दिन रात वह भगवान विष्णु का नाम जपता रहता था |

हिरण्यकश्यप अपने पुत्र की भक्ति से इतना परेशान हो गया की उसने अपने ही पुत्र को मारने का मन बना लिया | उसने अपनी बहन होलिका जिसे अग्नि देव का वरदान प्राप्त था | आग उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती | हिरण्यकश्यप ने होलिका से अपने पुत्र प्रह्लाद को गोदी में लेकर अग्नि की वेदी में बैठने को कहा | होलिका अग्नि की वेदी में बैठने को तैयार हो गई और उसने अपने गोद में प्रह्लाद को भी बिठा लिया | भक्त प्रह्लाद उस समय भी भगवान विष्णु का नाम जाप करता रहा | आग भक्त प्रह्लाद का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकी उल्टा अधर्म का साथ देने की वजह से होलिका आग में जलकर भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद आग से सुरक्षित बाहर आया |

अपने भक्त की साथ ये सब होता देख भगवान विष्णु इतने क्रोधित हुए की उन्होंने हिरण्यकश्यप को मारने के लिए नरसिंह का अवतार लिया | हिरण्यकश्यप का बध सुबह और शाम के समय दरवाजे के चौखट पर बैठ हिरण्यकश्यप को अपनी दोनों जांघ पर रख कर अत्याचारी हिरण्यकश्यप का  बध किया था |

इसके बाद वहां की प्रजा ने बड़े ही उत्साह और हर्षोउल्लास से खुशियां मनाई और इस दिन को आज तक होलिका दहन व होली के रूप में मनाया जाता हैं |