Ganga Saptmi

Ganga Saptmi

वैशाख मास के शुक्लपक्ष की सप्तमी को   गंगा सप्तमी के रूप में जाना जाता  है | आज के दिन माँ गंगा में स्नान कर पूजा अर्चना करने से जातक के समस्त पापों का निवारण होता है माँ गंगा में स्नान करने से जातक मोक्ष को प्राप्त करतें हैं इसीलिये इन्हें मोक्षदायनी भी कहा जाता है |

आइये जानते हैं माँ गंगा के पृथ्वी पर आगमन की कथा -

कहा जाता है कि कपिल मुनि के श्राप से राजा सगर के साठ पुत्र जलकर भस्म हो गए थे | राजा सगर के अनुरोध करने पर कपिल मुनि ने बताया कि यदि स्वयं माँ गंगा पृथ्वी पर आयें और उनके जल से इनका स्पर्श हो तभी ये जीवित होंगे | ऐसा सुनकर राजा सगर के वंशज भगीरथ ने घोर तपस्या की जिसके फलस्वरूप माँ गंगा ने पृथ्वी पर आने का निश्चय किया | परन्तु गंगा माँ के वेग को पृथ्वी नहीं सह सकती अगर गंगा माँ सीधे पृथ्वी पर आतीं तो उनका वेग इतना तेज था कि वो सीधे पाताल लोक में चलीं जाती, इसलिए ब्रह्मा जी ने भगीरथ से भगवान शिव जी की शरण में जाने को कहा | तब भगीरथ ने  कैलाश पर्वत पर जाकर भगवान शिव जी की तपस्या की और माँ गंगा के वेग को रोकने का अनुरोध किया | तब भगीरथ की प्रार्थना सुन भगवान शिव जी ने गंगा जी  को आदेश दिया कि वो हिमालय पर्वत की ओर से कैलाश पर्वत होते हुए भगीरथ के पीछे - पीछे पृथ्वी पर जाएँ |भगवान शिव का  आदेश पाकर माँ गंगा हिमालय पर्वत कि ओर से होकर जैसे ही कैलाश पर्वत पर आयीं तब भगवान शिव जी ने अपनीं  जटायें खोल कर देवी गंगा को उनमें स्थापित कर लिया और एक जटा पृथ्वी की ओर गिरा दी |  फिर उस जटा से होते हुए गंगा जी भगीरथ के पीछे - पीछे चलती गयीं और पृथ्वी पर पहुँच राजा सगर  के पुत्रों को स्पर्श कर श्रापमुक्त किया | राजा सगर के पुत्रों ने पुनः जीवन दान मिलने के कारण देवी गंगा को माता कहकर बुलाया | जब गंगा माँ अपना  कार्य समाप्त कर जाने लगीं तो सभी माता कहकर उनके चरणों में गिर गये और उनसे पृथ्वी पर रुकने की विनती करने लगे |  तब देवी गंगा ने माता शब्द सुन कर प्रेम विवश पृथ्वी पर रुकने का निश्चय किया , और तभी से देवी गंगा माता बनकर आज तक अपने भक्तों के कष्ट हर उन्हें दोषमुक्त करतीं आ रहीं हैं |

क्या आप जानतें हैं माँ पार्वती से श्रापित हैं गंगा -

माँ पार्वती का श्राप भी था गंगा जी  के पृथ्वी पर आने  कारण | माँ गंगा को पार्वती जी ने क्रोधित होकर सभी का मल- गन्दगी तथा दोषमुक्त करने का श्राप दिया था | क्योंकि एक बार माँ पार्वती ने अपने और भगवान शिव  जी के दिव्य पुंज को  देवी गंगा को रक्षा हेतु दिया था , परन्तु देवी गंगा उस पुंज का भार नहीं सह पायीं और विवश होकर वो दिव्य पुंज अग्नि देव को सौंप दिया | अग्नि देव भी उस देव पुंज की गर्मी को बर्दाश नहीं कर पाये और उस पुंज को गलती से पृथ्वी पर गिरा दिया | तब माँ पार्वती ने क्रोधित होकर अग्नि देव व देवी गंगा को श्राप दे दिया | उन्होंने देवी गंगा को श्राप दिया कि जिस तरह तुम पुंज का भार नहीं सह पायीं ठीक उसी तरह तुम्हे पृथ्वी लोक के समस्त प्राणियों के मल का भार सहना होगा तथा वो तुम्हारे जल से स्नान कर अपने पाप धोयेंगे | और चूँकि तुमसे यह गलती अनजाने में हुई हैं इसलिए तुम्हारा जल दूषित होने के बाद भी सबसे पवित्र होगा | जो भी तुम्हारे जल में स्नान करेगा उसके समस्त रोग नष्ट होंगे | हर अपवित्र वस्तु को तुम्हारे जल के स्पर्श मात्र से शुद्ध किया जाएगा | और जो तुम्हारे जल में स्नान करेगा वो मोक्ष को प्राप्त होगा |

अतः माँ गंगा पृथ्वी पर सबसे पवित्र हैं | उनके पवित्र जल में स्नान करने से मोक्ष   की प्राप्ति होती है |