BUDDHA PURNIMA

BUDDHA PURNIMA

बुद्ध पूर्णिमा  

बुद्ध पूर्णिमा वैशाख माह की पूर्णिमा को होती है | आज ही के दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था | वैशाख माह की पूर्णिमा का दिन गौतम बुद्ध के लिए बहुत ही अहम् दिन है उनके जीवन काल की तीन महत्वपूर्ण घटनाएं इसी दिन हुई थीं पहला ,  उनका जन्म दिवस है ये और दूसरा आज के ही दिन उन्हें सात वर्ष कठोर तपस्या के पश्चात्  ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और तीसरा, ८० वर्ष की उम्र में आज ही के दिन उनकी आत्मा शरीर को त्याग ब्रह्माण्ड  में विलीन हुई थी | भगवान बुद्ध ने अपने जीवन काल में अनेक उपदेश दिए थे | उन्होंने सबसे पहला उपदेश सारनाथ में दिया था | उन्होंने अपने शिष्यों को सत्य के मार्ग पर चलना सिखाया | भगवान गौतम बुद्ध भारत के महान दार्शनिक गुरु  एवं जैन धर्म के संस्थापक थे | उन्होंने संसार को दुःख ,मृत्यु आदि के कष्ट से मुक्ति दिलाने के  लिए सत्य की खोज की |

कौन थे महात्मा बुद्ध -

कपिलवस्तु के राजा शुद्धोधन के पुत्र थे महात्मा बुद्ध | इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था एवं इनकी माता का नाम माया था | जन्म के कुछ समय पश्चात् ही इनकी माता की मृत्यु हो गयी थी | ये बहुत ही दयालु एवं कोमल स्वाभाव के थे | इनके बाल्यकाल में ही विद्वानों ने भविष्यवाणी की थी कि ये बालक या तो एक महान शासक बनेगा या फिर यह बहुत ही महान आध्यात्मिक गुरु बनेगा | इस भविष्यवाणी से  चिंतित इनके पिता इन्हें  आध्यात्मिक गुरु नहीं अपितु एक कुशल शासक बनाना चाहते थे , इसलिए इनके पिता ने इन्हे महल की चारदीवारी के अंदर ही सभी साधन उपलब्ध कराये और हमेशा बाहर की दुनिया से दूर रखा | सभी प्रकार के दुःख और दर्द के आभास से उन्हें दूर रखा | सोलह वर्ष की अवस्था में ही इनका विवाह यशोधरा से हो गया था तब उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई जिसका नाम राहुल रखा गया | एक बार सिद्धार्थ अपने पिता की अनुपस्थिति में महल के बाहर गए वहां उन्होंने एक वृद्ध व्यक्ति , एक रोगी  और एक मृत व्यक्ति की अस्थि देखी , ये सब देखकर उन्होंने सोचा कि एक दिन मैं भी वृद्ध होकर रोगों से ग्रस्त हो जाऊंगा और मृत्यु को प्राप्त होऊंगा और वह बहुत चिंतित हो गए और उसी रात सत्य की खोज में निकल पड़े | सात साल तक कठोर तपस्या के पश्चात् उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान  की प्राप्ति हुई | उन्होंने अपने अनुयायिओं को बताया कि मृत्यु शरीर की होती है, आत्मा अजर है, और हमें अगर कष्टों से बचना है तो यह ध्यान रखना  चाहिए कि अति किसी  भी बात की अच्छी नहीं होती | किसी भी चीज़ की प्राप्ति या कार्य कि सफलता के लिए हमेशा मध्यम मार्ग ही चुनना चाहिए वही श्रेष्ठ है |

इस प्रकार उपदेश देते हुए ८० वर्ष की अवस्था में उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया था |