जानिए हमारे जीवन में तुलसी के महत्व

जानिए हमारे जीवन में तुलसी के महत्व

तुलसी हमारे लिए धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व का पौधा है। जो दर्शन-पथ में आने पर समस्त पापों का नाश कर देता है। स्पर्श किये जाने पर शरीर को पवित्र बनाता है, प्रणाम किये जाने पर रोगों का नाश कर देता है, जल से सींचे जाने पर यमराज के भय से मुक्त कर देता है। जिस घर में इसका वास होता है वहा आध्यात्मिक उन्नति के साथ सुख-शांति एवं आर्थिक समृद्धता स्वत ही जाती है। साथ ही तुलसी के नियमित सेवन से सौभाग्यशालिता के साथ ही सोच में पवित्रता और मन में एकाग्रता आती है और क्रोध पर पूर्ण नियंत्रण हो जाता है। आलस्य दूर होकर शरीर में दिनभर स्फूर्ति बनी रहती है। साथ ही हमारे हिन्दू धर्म में तुलसी की पूजा भी की जाती है। कहा जाता है की जहाँ भगवान श्रीहरि विष्णुजी की पूजा होती है वहां तुलसी जी की पूजा भी अवश्य होती है| दूसरे शव्दों में ऐसा भी कह सकते हैं कि श्रीहरि की पूजा तुलसी के अभाव में अधूरी ही होती है। साथ ही श्रीहरि के उपासकों एवं भक्तों के लिए स्वयं श्रीहरि विष्णुजी जितने पूजनीय हैं एवं आराध्य हैं, उतनी ही पूजनीय एवं आराध्य तुलसीजी भी मानी जाती हैं। तथा भगवान विष्णुजी को जितनी प्रिय लक्ष्मीजी हैं उतनी ही प्रिय तुलसीजी हैं। और यही कारण है की उन्हें भिन्न-भिन्न नामों जैसे- विष्णुप्रिया, विष्णुकांता, केशवप्रिया आदि से जाना जाता है। देवताओं के रूप में पूजे जाने वाले इस पौधेतुलसीकी पूजा कब कैसे, क्यों और किसके द्वारा शुरू की गई इसके कोई वैज्ञानिक प्रमाण तो उपलब्ध नहीं है परन्तु हमारी प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है कि देव और दानवों द्वारा किए गए समुद्र मंथन के समय जो अमृत धरती पर छलका, उसी से ‘‘तुलसी की उत्पत्ति हुई। और फिर ब्रह्मदेव ने उसे भगवान विष्णु को सौंप दिया और कहते हैं कि जिस प्रसाद में तुलसी नहीं होता उसे भगवान स्वीकार नहीं करते। भगवान विष्णु, योगेश्वर कृष्ण और पांडुरंग (श्री बालाजी) के पूजन के समय तुलसी पत्रों का हार उनकी प्रतिमाओं अर्थात मूर्तियों को अर्पण किया जाता है। साथ ही तुलसी- वृन्दा श्रीकृष्ण भगवान की प्रिया मानी जाती है। स्वर्ण, रत्न, मोती से बने पुष्प यदि श्रीकृष्ण को चढ़ाए जाएँ तो भी तुलसी पत्र के बिना वे अधूरे हैं। साथ ही इस पौधे की पूजा विशेष कर स्त्रियाँ करती हैं। तथा तुलसी पत्र से पूजा करने से व्रत, यज्ञ, जप, होम, हवन करने का पुण्य प्राप्त होता है। साथ ही जितने भी श्रीहरि के अवतार है उन सभी को यदि हम तुलसी अर्पित करें तो परम सौभाग्यकारक माना जाता है, चाहे यह अवतार विष्णु, राम, कृष्ण, नृसिंह, वामन, लक्ष्मी-नारायण में से कोई भी क्यों हो। और इसके अतिरिक्त अन्य सभी देवताओं की उपासना में पुष्प आदि के साथ-साथ तुलसी भी अर्पित करने से इन देवताओं की कृपा शीघ्र प्राप्त की जा सकती है।