क्यों की जाती है मंदिर की परिक्रमा

क्यों  की  जाती है मंदिर की परिक्रमा

आखिर क्यों हम मंदिर की परिक्रमा करते हैं ? इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं ? परिक्रमा करने का कारण शायद आप जानते भी होंगे या नही भी |

 

किसी मंदिर की परिक्रमा करना हमारे लिए बेहद गुणकारी तथा लाभकारी सिध्द होती है | मंदिरो मे सकारात्मक ऊर्ज़ा होती हैं और जब हम इसकी परिक्रमा करते हैं,तब वह ऊर्ज़ा हमारे शरीर में स्थानांतरित (टरान्सफरड) होती है | जिसके कारण हमे साकारात्मक ऊर्ज़ा पाप्त होती है |

 

साकारात्मक ऊर्ज़ा के लाभ हमे तभी होगा जब हम सही परिक्रमा करेंगे |

 

परिक्रमा करने की सही नियम है - जिस तरफ घड़ी की सुई घूमती है उसी दिशा की तरफ परिक्रमा करना | विपरीत दिशा की तरफ परिक्रमा करने पर हमे परिक्रमा का कोई लाभ नही मिलेगा |

 

परिक्रमा का लाभ यह है की हमारे अंदर साकारात्मक ऊर्ज़ा बढ जाएगी और नाकारात्मक उर्ज़ा का नष्ट होना आरम्भ हो जाएगा | यह ऊर्ज़ा हमे इश्वर से सदा जोडे रखती है |