MAKAR SANKRANTI

DR. VINAY BAJRANGI

मकर संक्रांति

सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं  तो इस स्थिति को मकर संक्रांति कहा जाता है | इसका महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि इस दिन सूर्य उत्तरायण हो जाते है उत्तरायण काल को ही ऋषिमुनियों ने पुण्यकाल माना है  | भीष्म पितामह ने भी इसी काल में प्राण त्यागे थे ! कहते हैं इस दिन किये गए दान पुण्य से करोड़ गुना फल प्राप्त होता है

क्या करें इस दिन

1. इस दिन सूर्यौदय से पूर्व उठकर स्नान करें | लाल वस्त्र पहनकर एवं लाल आसान बिछाकर सूर्य साधना  करें | सूर्य कवच और सूर्य चालीसा का पाठ करें|

2. यदि संक्रांति रविवार  को पड़े तो रविवार का व्रत करें |

3. इस महापर्व पर अपने पूजाघर में सूर्ययंत्र स्थापित करें

4. सूर्य मंदिर जाकर सूर्य देव के दर्शन करें |

5. इस दिन सूर्य अर्चना , दर्शन   और दान करना अत्यंत कल्याणकारी होता है |

वैदिक शास्त्रानुसार

1.      वैदिक शास्त्रों के अनुसार इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनि देव (जो मकर राशि का स्वामी है के घर मिलने जाते है। ज्योतिष की दृष्टि से सूर्य और शनि का तालमेल संभव  नही है, लेकिन सूर्य खुद अपने पुत्र के घर जाते है। इसलिए पुरानो में यह दिन पिता पुत्र के संबंधो में निकटता के रूप में मनाया जाता है।

2.      ऐसा कहा जाता है की इसी दिन भगवान विष्णु ने मधु कैटभ से युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी। उन्होंने मधु के कंधो पर मंदार पर्वत रख कर उसे दबा दिया था। इसलिए भगवन विष्णु इस दिन से मधुसुदन कहलाये।

3.      गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भागीरथ ने इस दिन अपने पूर्वजो के आत्मा के शांति के लिए इस दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद ही गंगा समुद्र में जा मिली थी। इसलिए गंगा सागर में मेला लगता है।

4.      माँ  दुर्गा ने महिषासुर का वध करने के लिए इसी दिन धरती  पर कदम रखा था।

5.      पितामह भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण होने पर स्वेच्छा से शरीर त्याग किया था। क्योंकि उत्तरायण में शरीर त्यागने वाले व्यक्ति की आत्मा को मोक्ष मिलती है या देवलोक में रहकर पुनः गर्भ में लौटती है।

इस दिन को सुख और समृद्धि का माना जाता है। और इस दिन किये गये कार्य  जैसे  पवित्र नदी में स्नान, दान, पूजा आदि के पुण्य हजार गुना हो जाते है । इसलिए इस दिन गंगा सागर में मेला भी लगता है।