शनि संवारे सभी काम

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शनि ग्रह का नाम सुनकर ही हर व्यक्ति के मन में एक भय सा बैठ जाता है और मानो हम नाकारात्मकता की ओर घिरने लगते हैं। लेकिन आप शनि की नाकारात्मकता की ओर ही न जाएं बल्कि इसके कई गुण हैं जो आपको सुख प्रदान करते हैं आईए मैं विनय बजरंगी आपको बताता हूं कि शनि का नाम जपने से हमें क्या सुख मिलता है।

आईए सबसे पहले आपको बताते हैं कि शनि के कारण कौन सी परेशानियों से इंसान घिरा रहता है। जैसे जीवन में बीमारी, मौत, दुख, मुसीबत, आलस्य, दरिद्रता पैरों के रोग, खेतीबाड़ी के साधन, लोहे के उपकरण संबंध भी शनि से ही है।  इस ग्रह को मोक्ष प्राप्ति का ग्रह भी माना जाता है।

अगर बात करें भारतीय ज्योतिष की तो इस ग्रह को अशुभ माना जाता है लेकिन यह ग्रह फलदायक है। यह ग्रह वृष, तुला, मकर और कुंभ लग्न मे जन्म लेने वाले व्यक्तियों के लिए बेहद लाभदायक माना गया है। अगर इसे न्यायप्रिय ग्रह कह लिया जाए तो कहना जरा भी गलत न होगा। जिन लोगों का धार्मिक कार्यों से कोई सरोकार नहीं होता और जो हमेशा बुरे या गलत कार्यों में लिप्त रहते हैं उन्हें शनि ज्यादा परेशान करता है।मनुष्य के पिछले कर्मों के फलस्वरूप ही शनि का प्रभाव इंसान पर पड़ता है। मकर और कुंभ लग्न वाले व्यक्तियों का लग्नेश लाभकारी होता है। अगर कुंडली में शनि बहुत नीच हो तो अस्त होने पर कई मुश्किलें लेकर आता है।

अगर बात की जाए शनि ग्रह के गोचर की तो इसे सबसे धीमा माना गया है अत: उसे शनै: शनै: शनैचराय के नाम से भी संबोधित किया जाता है।

जब किसी परिवार के कई सदस्यों पर एक साथ शनि की ढैय्या चल रही हो तो उस समय परिवार को कई परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। इसलिए परिवार से शनि का प्रभाव कम करने के लिए हनुमान जी की पूजा अर्चना करनी चाहिए।

शनि की उपासना के लिए पदमपुराण में वर्णन किए गए राजा दशरथ स्तुति का हर रोज सुबह उठ कर पाठ करना चाहिए।

इसके बाद अंत में प्रार्थना करनी चाहिए। काले तिल से दशांश हवन और आरती करनी चाहिए।

शनि के कष्टों को खत्म तो नहीं किया जा सकता। हां लेकिन इसको कम जरूर किया जा सकता है। शनि हमें सहनशील बनाता है। जिनके लिए शनि शुभ है लाभकारी है जिन पर शनि की ढैय्या, साढ़ेसती नहीं चल रही उन्हें भी शनि की उपासना करते हुए शनि मंत्र का जाप करना चाहिए।

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