गणपति का गुणगान

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गणपति की साधना जीवन में अहम महत्व रखती है। गणपति की भक्ति और साधना करके जीवन के सभी सुखों को प्राप्त किया जा सकता है। विघ्नहर्ता सभी की बाधाओं को करते हैं दूर। सभी की इच्छाओं, मनोकामनाओं का रखते हैं ध्यान। आप सोच रहें होंगे कि मैं विनय बजरंगी यहां पर गणपति के गुणों का गुणगान करने लगा हूं तो आपने बिल्कुल सही अंदाजा लगाया है कि गणपति कैसे हमारे सभी कष्टों को करते हैं दूर। अगर कोई व्यक्ति इनकी पूजा पूरे विधि-विधान के साथ करता है तो उसको हर तरफ से लाभ प्राप्त होता है। सफलता आपके कदम चूमती है। यही नहीं अगर आप पर किसी तरह का कर्ज से परेशान है तो गणेश जी को पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा-अर्चना करने से सभी तरह के कष्टों से छुटकारा मिलता है और साथ ही आलस, दुख, दरिद्रता दूर होती है। इनकी पूजा करने से आर्थिक लाभ के साथ-साथ व्यापार को भी उन्नति मिलती है। धन की कोई कमी नहीं रहती और कमाए गए धन का उपयोग अच्छी जगह पर होता है। मन की सभी इच्छाएं गणपति पूरी करते हैं। ऐसा माना जाता है कि गणेश जयंती जो भाद्र शुक्ल चतुर्थी को आती है तो इसके लिए किसी भी बुधवार को पूजा विधि-विधान के करने से शीघ्र फल मिलने की संभावना बढ़ती है।

इसके लिए सबसे पहले तो पूरी पूजा की सामग्री लेकर और साथ ही इसके लिए गणपति यंत्र और मूंगे की माला की बहुत ज्यादा जरूरत होती है।

स्नान करके पीले कपड़े पहने फिर पूर्व की ओर मुख करके बैठे। इसके बाद गणपति यंत्र को एक थाली में सिंदूर से स्वास्तिक बना कर इसकी स्थापना करें। इसके बाद पूरे श्रद्धा भाव से गणपति जी की अराधना करें।

गणपति का ध्यान करते हुए अपनी मनोकामना को नाम, गोत्र के साथ दोहराएं।

इसके बाद गणपति यंत्र की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद 21 माला का जप करें। गणेश जी का ध्यान करें और इस मंत्र का जाप करें।

ओम एक दंतात विदम्हे वक्र तुंडाय धीमहि तन्नो विघ्न प्रचोदयात।

इसके बाद पूजा वाले स्थान में रखे गए नारियल को तोड़ कर गिरी गणेश जी को चढ़ाएं। इससे आपकी सभी तरह की दुख तकलीफें दूर होंगी। इसके बाद शुद्ध घी से भगवान गणपति की आरती करें इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

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