बृहस्पति का केसर प्रेम…

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केसर का करिश्मा…भई आप सोच रहें होंगे कि मैं विनय बजरंगी आपको यहां केसर के महत्व के बारे में बताने लगा हूं तो आपने सही अंदाजा लगाया। आप सोच रहें होंगे कि ज्योतिष विद्या में केसर का क्या काम या केसर का क्या महत्व तो आईए आपकी शंका को दूर करते हैं और आपको बताते हैं कि केसर का ज्योतिष में महत्व। जब आप भी केसर के गुणों का महत्व ज्योतिष में जानोगे तो आपके भी सभी रूके हुए या अधूरे पड़े काम पूरे होने लगेंगे। केसर हमें सकारात्मकता की ओर ले जाता है। यही नहीं ये कई प्रकार के रोगों से भी हमें निजात दिलाता है।

केसर हम में सात्विक गुण उत्पन्न करता है। इसकी सुंगध के तो क्या कहने। केसर का प्रतिनिधित्व बृहस्पति ग्रह करता है। ग्रहों में बृहस्पति को सबसे ज्यादा गुणों वाला ग्रह माना जाता है। बृहस्पति अगर वक्री हो, उच्च राशि या नीच राशि में हो तो ज़िंदगी में कई उतार-चढ़ाव आते हैं। माना जाता है कि अगर बृहस्पति मार्गी होगा तो इंसान अपनी बुद्धि से सभी सही निर्णय लेता है। अगर बृहस्पति वक्री होगा तो कई तरह की उलझनें, लड़ाई-झगड़े और विवाद खड़े करेगा। बृहस्पति को ज्ञान, बुद्धि और विद्या का ग्रह माना जाता है। इससे ज्ञान में इजाफा होता है।

बृहस्पति को मांगलिक कार्यों का प्रतीक भी माना जाता है। घर में कोई भी शुभ कार्य करना हो तो केसर का तिलक लगाना बहुत ही लाभकारी माना जाता है। घर में किसी भी काम के लिए जाएं तो केसर तिलक लगा कर निकलना चाहिए इससे आपके सभी काम हो जाएंगे। अगर विवाह शादी में देरी या कोई और समस्या आ रही है तो इसे बृहस्पति का कमजोर होना माना जाता है।

बृहस्पति की इसी कमजोरी को दूर करने के लिए आप केसर का इस्तेमाल किसी भी रूप में जैसे दूध में डाल कर, खीर बनाकर या ठंडे दूध में डालकर इस्तेमाल करने से यानि के उसे खाने या पीने से बृहस्पति एक सकारात्मक ऊर्जा देता है। इससे वैवाहिक जीवन भी सुखमय रहता है। देखा आपने कैसे केसर बृहस्पति को कमजोर करता है। बृहस्पति सकारात्मक ऊर्जा देता है। इसलिए बृहस्पतिवार वाले दिन केसर का तिलक लगाना भी बेहद लाभदायक होता है।

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