पवन पुत्र की लीला है न्यारी…

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हनुमान जी के कई रूप हैं कभी वो प्राणरक्षक बन जाते हैं तो कभी संगीतज्ञ प्रेमी और कभी कथावाचक। हनुमान भक्तों पर जब कोई मुश्किल आती है तो भक्त उन्हें सबसे पहले याद करते हैं। इसलिए तो उन्हें कहा जाता है संकटमोचक। जो हनुमान के भक्त हैं उन्हें शनि कभी परेशान नहीं करता। आईए मैं विनय बजरंगी आपको बताता हूं कैसे हनुमान जी हमें मुसीबतों से निकालते हैं इनके बारे में कई गाथाएं प्रचलित हैं। आईए इसके बारे में मैं आपको बताता हूं। हनुमान जी मैं ऐसी ताकत है जो काम राम भगवान से नहीं होता उसे हनुमान जी चुटकियों में कर देते हैं। लंका को पार करने के लिए भगवान राम ने पुल बनवाया था लेकिन हनुमान जी तो भगवान राम का नाम लेकर खुद ही समंद्र पार कर गए थे।

भगवान को प्राण रक्षक इसलिए माना गया है उन्होंने ही संजीवनी बूटी लाकर लक्षमण की जान बचाई थी।

जब सीता माता रावण की लंका में कैद थी तो वो त्रिजटा, चंद्रमा और अशोक से मरने के लिए अग्नि मांग रही थीं उसी समय हनुमान जी ने प्रकट होकर मुद्रिका दे कर माता सीता के अशांत चित को शांत किया।

भगवान हनुमान जी संगीतज्ञ प्रेमी भी हैं। इस बात का प्रमाण इस बात से मिलता है जब लंका में जाकर भगवान हनुमान जी ने विभीषण को माता सीता की कहानी सुनाई तो उनके बोलने से के लहजे को सुनकर वो बहुत प्रभावित हुए और उनका मन गदगद हो उठा।

भक्तों को सबसे अग्रणी हैं हनुमान जी देखिए जब सीता मां को कोई लाने को तैयार नहीं हुआ तब भगवान हनुमान ही थे जिन्होंने सीता माता को लाने के लिए पहल की थी। यही नहीं उनके क्रोध की ज्वाला भड़क उठी और उन्होंने सारी लंका को आग के हवाले कर दिया।

सेवा में देखिए कितनी ताकत होती है और सेवा भी किसी किसी को ही नसीब होती है। भगवान राम के सारे काम हनुमान जी ही करते थे। एक बार उन्होंने सारे काम तीन भाईयों में बांट दिए। वो कहते हैं न कि जिसका काम उसी को साजै यानि कि जो काम जिसके लिए बना है वही उसे कर सकता है दूसरा कोई और नहीं। तीनों भाईयों में राम भगवान का काम बंटने के कारण हनुमान जी हताश थे कि अब वो कैसे भगवान राम की सेवा करेंगे। एक बार जम्हाई लेते हुए भगवान राम का मुंह खुला रह गया। इसके लिए गुरु वशिष्ट ने हनुमान जी को बुलाने को कहा। इस तरह हनुमान जी ने मात्र एक चुटकी बजाई और भगवान राम का मुंह बंद हो गया। इस तरह हनुमान जी को भगवान राम की सेवा प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

हनुमान संकटमोचक बनकर सारे दुखों को हर लेते हैं। वो भूत प्रेत से हमारी रक्षा करते हैं।

यह भी विश्वास किया जाता है कि हनुमान के भक्तों को शनि कभी भी परेशान नहीं करते। कहा जाता है कि लंका में रावण ने शनि को उल्टा लटकाया था तो हनुमान जी ने ही शनि को मुक्त करवाया था तो उसी वक्त शनि ने हनुमान जी से कहा था कि वो हनुमान के भक्तों को कभी परेशान नहीं करेगा।

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