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करूं आरती….

kruaarti

पूजा पाठ करने से हमारे मन में सात्विक विचार आते हैं ये बाहरी पूजा पाठ ही हमें अंदर की भक्ति की ओर प्रेरित करती है। अगर हम सारी प्रकृति पर नज़र दौड़ाएं तो प्रकृति भी दिन रात विचरण करते हुए हमें पूजा पाठ और आरती करने की ओर प्रेरित करती है। दिन रात कैसे अपने समय से चढ़ते और छिपते हैं इसे प्राकृति के खेल न कहें तो और क्या कहें। रात को तारों का चमकना, सुबह सूर्य का चढ़ना, ये सब प्रकृति नजारे अपने आप में एक तरह की भक्ति में लीन हैं। जब भी हम पूजा करते हैं तो उसके साथ आरती भी जरूर करते हैं। जो कि पूजा का महत्वपूर्ण अंग है।

आरती करने के लिए जरूरी है जिस देवता की पूजा करते हैं जिस मंत्र से पूजा की गई हो उसी से तीन बार पुष्पांजलि अर्पित करनी चाहिए। ढोल, नगाड़े, घड़ियाल की थाप पर जय जयकार करते हुए अनेक तरह की बतियां जलाकर आरती करनी चाहिए। आमतौर पर पांच बतियों से आरती की जाती है जिसे पंचद्वीप आरती भी कहा जाता है। आरती सारे वातावरण में एक रस घोल देती है जिसकी सुंगध और धुनों को सुनकर हर कोई खींचा चला आता है। आरती का मक्सद होता है कि अगर पूजा पाठ में किसी तरह की कोई त्रुटि या कमी रह गई है तो आरती उस कमी को दूर कर देती है और इस तरह आपकी पूजा की गई सफल हो जाती है।

आरती करने के फायदे ही फायदे हैं जैसे इससे घर में कोई नकारात्मक ऊर्जा नहीं आ सकती और परिवार के सभी सदस्य ऊर्जावान और सकारात्मकता से लबरेज नज़र आते हैं। देवता खुश होकर अपने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हैं। ईष्ट देवता को दीपक दिखाकर उनका गुणगान किया जाता है। जैसे मंदिर में सभी देवताओं की पूजा की जाती है। उसी तरह आप घर में भी सभी देवताओं की पूजा करने के साथ आरती करके देवताओं को प्रसन्न करके आपार खुशियां पा सकते हो।

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