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शिक्षा में सफलता की सीढ़ियां…

sikshasidhi

आज इंसान शिक्षा को लेकर इतना जागरूक हो चुका है। वो चाहे खुद का गुजारा गरीबी में कर लेगा और अपनी सारी जमा पुंजी बच्चों पर खर्च देता है उसे पता है कि उसकी ज़िंदगी तो जैसे तैसे कट गई अब उसके बच्चे तो न उसी ढर्रे पर चलें उनकी भी ख्वाहिश होती है कि उनके बच्चे भी बाबू बने और उन्हें हर कोई सलाम ठोके। मां-बाप अपने बच्चों पर अपने खून पसीने की कमाई खर्च तो कर देते हैं लेकिन कई बार क्या होता है कि बच्चा पढ़ता तो बहुत है लेकिन पढ़ते वक्त उसका मन एकाग्र नहीं हो पाता लेकिन बच्चे का मन पढ़ाई में कैसे लगे। इसके लिए मां-बाप और बच्चे दोनों ही हताश हो जाते हैं तो आईए मैं विनय बजरंगी आपको बताता हूं मां बाप और बच्चों को हताश होने की जरूरत नहीं है। इसके लिए बच्चों की शिक्षा का अंदाजा एक ज्योतिष जन्मकुंडली देखकर लगा सकता है। शिक्षा के लिए जन्मकुंडली में प्रथम भाव, पंचमेश भाव, द्वितीय, चतुर्थेश, गुरु और बुध की अहम भूमिका होती है।

अगर शनि का लग्नेश पर प्रभाव पड़े और साथ ही राहु की भी लग्नेश पर दृष्टि हो तो ऐसे विद्यार्थी सुस्त होते और पढ़ाई में उनका मन नहीं लगता। अगर ये सुबह उठते भी हैं तो उन्हें पढ़ाई करते वक्त नींद घेर लेती है।

कई बार विद्यार्थी इतना पढ़ते हैं कि चौबीस घंटों किताब तो पढ़ते रहेंगे लेकिन उन्हें याद कुछ नहीं हो पाता कारण हैं पढ़ाई में मन एकाग्र न होना। ऐसा इसलिए होता है अगर लग्न और लग्नेश दोनों ही चर राशियों में हो और चंद्रमा भी पाप से पीड़ित हो तो मन एकाग्रचित नहीं हो पाता।

उन विद्यार्थियों को पढ़ाई से बहुत डर लगता है और क्लास में सबसे पीछे बैठते हैं कारण है सूर्य नीच राशिगत हो तो विद्यार्थी को अपने पर ही विश्वास नहीं होता।

इसलिए अगर आप चाहते है कि आपके बच्चे शिक्षा के हर क्षेत्र में अव्वल आएं तो इसके लिए आपको किसी ज्योतिष से मिलकर बच्चे की कुंडली दिखानी होगी। कुंडली से देखकर पता चलता है कि बच्चा शिक्षा में सफलता की सीढ़ियां चढ़ेगा या नहीं।

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