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शुक्र का करें शुक्रिया

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शुक्र ग्रह को भोग कारक, धन प्राप्ति और निधि प्राप्ति का ग्रह माना जाता है तो फिर हर कोई इसका धन्यवाद क्यों न करेगा। आईए मैं विनय बजरंगी आपको बताता हूं कि इस ग्रह से आप कैसे लाभ हासिल कर सकते हैं और अपने सूने जीवन में उजाला भर सकते हो। ऐसा माना जाता है कि जिस ग्रह में बारहवें भाव स्थित होता है वो ग्रह को हानि पहुंचाता है। अगर बात करें शुक्र की तो शुक्र ग्रह बारहवें भाव में रहकर धन लाभ देता है और धन के योग बनाता है। अगर बारहवें भाव में शुक्र हो तो फिर तो हो जाती है बल्ले-बल्ले। बारहवां भाव भोग का माना जाता है। भोग में शुक्र बेहद खुश रहता है।

अगर शुक्र दसवें स्थान में स्थित हो और नवमेष द्वारा दृष्ट हो तो ऐसे व्यक्ति को निधि हासिल होती है। शुक्र की द्वादश स्थान में स्थिति काफी अच्छी मानी गई है।

यही नहीं छठे स्थान में भी शुक्र की स्थिति को शुभकारी माना गया है। उसकी बारहवें भाव में दृष्टि पूर्ण रहने से भोग का योग बनता है।

जिन जातकों के जीवन में बारहवें भाव में शुक्र स्थित होता है। वो व्यक्ति बिना किसी उलझन के अपना जीवन सुविधा पूर्वक चला लेते हैं। द्ररिद्र व्यक्ति को धन प्राप्त नहीं होता। लेकिन तब द्ररिद्र व्यक्ति को धन प्राप्त होता है अगर शुक्र ग्रह लग्न के साथ और चंद्र लग्न से द्वादश हो या किसी दो लग्नों  में द्वादश भाव में स्थित हो तो शुक्र दोहरा लाभ देता है। इससे व्यक्ति के बेहद अमीर बनने का योग बनता है।

भौतिक सुखों के लिए इंसान सारी उम्र इसके पीछे भागता रहता है। शुक्र ग्रह भौतिक सुखों के लिए जिस भाव का कारक लग्न से द्वादश भाव में स्थित हो तो शुक्र जाया भाव कारक बनता है। जिन जातकों के बारहवें भाव में शुक्र रहता है, उन्हें स्त्री सुख हमेशा मिलता है। देखा आपने कैसे शुक्र आपके जीवन में खुशियां लाता है विपरीत परिस्थियों के बावजूद भी।

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