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धन की खनक

dhan-khanak

धन कमाने की लालसा हर किसी की होती है। धन की भूख ऐसी भूख है जो कभी भी शांत नहीं होती बल्कि बढ़ती ही जाती है। अगर हमारे पास हजारों है तो हम लाखों चाहते हैं और अगर लाखों है तो हमारी तमन्ना होती है कि करोड़ों अरबों रूपैया हमारे पास हो। इसके पीछे इंसान सारी उम्र भागता रहता है। आईए मैं विनय बजरंगी आपको बताता हूं कि वे कौन से योग है जिसके कारण इंसान अमीर बनता है।

धन तभी प्राप्त होता है जब जन्मकुडली के द्वितीय भाव को धन भाव, एकादश भाव को लाभ भाव, केंद्र स्थानों को विष्णु और त्रिकोण को लक्ष्मी का स्थान माना गया है।

गुरु और शुक्र ऐसे ग्रह हैं जिसे धन कारक ग्रह माना गया है।

अगर कुंडली में दूसरा भाव है तो किसी की धन संबंधी जरूरतें अपने परिवार से ही पूरी हो जाएंगी। दूसरा भाव परिवार की और से इक्टठी की गई संपति को दर्शाता है। इससे व्यक्ति परिवार की ओर से बनाई गई संपति मिलती है। आपको यह जानकर हैरत भी होगी कि आपको पैतृक संपति इतनी ज्यादा मिलेगी कि आपको कुछ करने की आवश्यकता भी नहीं है। देखा आपने कुंडली के दूसरे भाव का कितना महत्व है।

यही नहीं छठा भाव व्यक्ति की नौकरी का प्रतीक है। यही नहीं ऐसा व्यक्ति अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए ऋण भी ले सकता है।

बेहद अमीर वो व्यक्ति होता है जब केंद्र-त्रिकोण भाव के स्वामी ग्रहों के मेल से दूसरे भाव के स्वामी के साथ केंद्र त्रिकोण या एकादश में भावगत हो तो ऐसा व्यक्ति शहंशाह होता है। उसके पास धन की कोई कमी नहीं रहती।

यही नहीं धनेश और लाभेश का स्थान बदलने का कारण भी धन की कोई कमी नहीं रहती। जिसके कारण व्यक्ति दिन प्रति दिन अमीर होता चला जाता है उसे कभी धन की कमी नहीं खलती।

द्वितीयेश के साथ अगर लग्नेश, चतुर्थेश और पंचमेश का किसी तरह से संबंध बनता हो तो व्यक्ति के चारों हाथ घी में होते हैं यानि कि अमीर होता है।

अगर आप अमीर बनने का सपना संजोए बैठे है और आप कैसे अमीर बन सकते हो अगर इसके बारे में कोई सवाल या जानकारी लेना चाहते हो तो आप नोएडा स्थित बजरंगी धाम आ सकते हो।

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