मुहूर्त का महत्व

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मुहूर्त बदलेगा आपकी तकदीर को। आप सोच रहें होंगे कि जो परमात्मा ने हमारी किस्मत में लिख दिया भला उसे हम कैसे बदल सकते हैं। ये सच है कि ईश्वर ने जो आपके नसीब में लिख दिया वहीं आपको मिलेगा। अक्सर कहा जाता राई बढ़े न तिल घटे जो लिखा करतार ने। अर्थात् कहने का भाव यह है कि जो माथे पर ईश्वर ने लिख दिया उसे बदला नहीं जा सकता। क्या आपको पता है कि अगर आप शुभ मुहूर्त को मानोगे तो इससे पूर्व कर्मों के गलत प्रभावों से भी आप बच सकोगे आईए मैं विनय बजरंगी आपको बताता हूं कि कैसे आप अपने भाग्य को बदल सकते हो वो भी शुभ मुहूर्त के बल पर। जन्म पत्रिका हमारे पूर्व में किए गए कर्मों को दर्शाती है। जिसे हम भाग्य का नाम देते हैं। भविष्य का वर्णन ज्योतिष जन्म पत्रिका के सहारे करते हैं। वैसे तो भविष्य के सारी जानकारी विधाता के हाथ में है।

वो कहते हैं न कि समय बदलते देर नहीं लगती यानि कि काल ज्योतिष का आधार माना जाता है। कोई चुनी हुई घड़ी शुभ मुहूर्त में बदल जाती है। जो आपके सभी कष्ट, बांधाएं दूर कर देती है।

मुहूर्त जिसका अर्थ है कि बिना किसी विघ्न से किसी कार्य का पूरा हो जाना। ज्योतिष में एक सिद्धांत और दूसरा होरा में मुहूर्त ज्योतिष का स्थान संहिता स्कंध में आता है। रोजमर्रा के जीवन के लिए मुहूर्त का बहुत महत्व है। जन्मपत्री से हम अपने पूर्व के कर्मो का लेखा-जोखा मान सकते हैं।

अगर शुक्ल या कृष्ण पक्ष के मंगलवार को तृतीया आए, अष्टमी तेरस को कोई कानूनी दाव पेच हो तो उसमें आपको सफलता मिलेगी। शुक्ल पक्ष की पंद्रह तिथियां अपने आप में अद्भुत शक्तियां समेटे हुए बैठी हैं। अगर बात करें अमावस्या की तो इसे किसी भी कार्य के लिए शुभ नहीं माना जाता। लेकिन ऑपरेशन के लिए अमावस्या को सही माना जाता है। पूर्णिमा में तो कभी भी ऑपरेशन नहीं करवाना चाहिए। अमावस्या को सेहत के लिए सही नहीं माना जाता।

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