अन्य नक्षत्रों के योग और मुहूर्त

nakshatr-time-date

द्विपुष्क योग, त्रिपुष्कर योग क्या है, पंचक नक्षत्र, विवाह शादी के लिए शुभ नक्षत्र कौन से आईए मैं विनय बजरंगी आपको थोड़ा संक्षेप में बताता हूं।

मंगलवार, शनिवार को तिथि 2, 7 या 12 हो तथा उस दिन मृगशिरा, चित्रा, घनिष्ठा नक्षत्र पड़े तो इस संयोग में कार्य या घटना के घटित होने पर उसके दो बार होने की , पुन:  पुनरावृति अथवा दोहरे लाभ या हानि की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

त्रिपुष्कर योग में मंगलवार, शनिवार या रविवार को तिथि 2, 7 या 12 हो तो उस दिन कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा और पुनर्वसु, विशाखा या पूर्वा भाद्रपद पड़े हो तो इस संयोग से त्रिपुष्कर योग की उत्पति होती है। इस योग में होने वाले किसी भी प्रकार के शुभ या अशुभ कार्य अथवा घटनाओं की तीन बार पुन: घटित होने की आशंकाएं प्रबल हो जाती हैं।

विवाह शादी के लिए शुभ नक्षत्र- रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्रों को विवाह कार्यो के लिए शुभ माना जाता है।

यात्रा के लिए शुभ नक्षत्र- यात्रा के लिए हस्त, मृगशिरा, अनुराधा, श्रवण, अश्विनी, पुष्य, रेवती, घनिष्ठा और पुनर्वसु नक्षत्रों को अत्यंत शुभ माना जाता है। रोहिणी, तीनों उत्तरा, तीनों पूर्वा, ज्येष्ठा, मूल और शतभिषा नक्षत्रों को मध्य श्रेणी का माना गया है।

यात्रा के लिए दिशा शूल नक्षत्र- पूर्वा में ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा दक्षिण में विशाखा को यात्रा शूल नक्षत्र माना गया है। ये नक्षत्र यात्रा के लिए वर्जित हैं। इसके साथ-साथ जन्म नक्षत्र, विपत, प्रत्यरि और वध (1, 3, 5, और 7) नक्षत्रों को यात्रा के लिए अशुभ माना गया है। जो यात्रा के लिए वर्जित हैं।

यात्रा के लिए वार शूल नक्षत्र- रवि को मघा, सोम को विशाखा, मंगल को आर्दा, बुध को मूल, गुरु को कृतिका, शुक्र को रोहिणी तथा शनिवार को हस्त नक्षत्र को यात्रा के लिए वर्जित हैं।

अगर आपके मन भी ग्रह, नक्षत्रों के बारे में कोई विचार है या कोई सवाल पूछना चाहते है अथवा इससे संबंधित कोई बात करना चाहते हो तो आप नोएडा स्थित बजरंगी धाम आ सकते हो। बजरंगी धाम के दरवाजे आपके लिए हमेशा खुले हैं। तो फिर सोचिए नहीं और चले आईए बजरंगी धाम यहां आपको मिलेगा हर मुश्किल का समाधान।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *