Connect
To Top

संतान सुख का सौभाग्य

child

हर किसी की चाहत होती है कि उसकी अपनी औलाद हो। जो उन्हें प्यार से मम्मा-पापा कहे। लेकिन संतान का सौभाग्य हर किसी को नसीब नहीं होता। जिनके जीवन में औलाद का सुख नहीं होता या उनके औलाद नहीं होती। औलाद न होने के कारण ज्योतिषीय में कौन-कौन से हैं जिससे बाधाएं उत्पन्न होती हैं आईए मैं विनय बजरंगी आपको इन रूकावटों के बारे में बताता हूं। संतान उत्पति में पति-पत्नी की कुंडली बड़ा ही महत्व रखती है। अगर आदमी की कुंडली में सूर्य और शुक्र औरत की कुंडली में मंगल और चंद्रमा कमजोर यानि कि निर्बल हो तो संतान प्राप्ति में बाधाएं पैदा होती हैं। डॉक्टरी इलाज कराने पर ही संतान सुख हासिल होता है।

जन्मकुंडली में पंचम भाव को संतान का भाव माना गया है। पंचम से पंचम और नवम से नवमेश का विचार जरूर करें। अगर जन्मकुंडली में पंचम भाव में शत्रु ग्रह या त्रिक भाव के स्वामी स्थित हो या अन्य किसी कारण से पीड़ित हो तो संतान प्राप्ति में मुश्किलें आती हैं।

बृहस्पति संतान प्राप्ति का कारक तो है लेकिन संतान प्राप्ति में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। ऐसा माना गया है कि बृहस्पति की दृष्टि में अमृत की वर्षा होती है। अगर पंचम भाव में कोई पाप योग बन रहा हो या पंचमेश कमजोर और बृहस्पति की नजर इन पर पड़े तो कुछ अड़चनों के बाद संतान सुख की प्राप्ति होती है।

सूर्य, मंगल और बृहस्पति को पुत्र प्राप्ति का प्रतीक माना गया है। इसके अलावा शुक्र, चंद्रमा बेटी का कारक है। जन्मकुंडली में पंचमेश, नवमेश, लग्नेश और बली बृहस्पति की अंतर्दशा या प्रत्यंतर्दशा गर्भाधान के लिए शुभ होती है। इसके अलावा जिस राशि में पंचमेश ग्रह हो या उससे गोचरवश जब बृहस्पति उस राशि में या उससे पांचवी, सातवीं और नौंवी राशि में आए तो यह समय गर्भाधारण के लिए शुभ माना जाता है।

अगर आप भी औलाद प्राप्ति के लिए कोई प्रश्न  पूछना चाहते हो या संतान प्राप्ति में रूकावटें क्यों आ रही हैं इसके लिए आप किसी तरह का प्रश्न पूछ सकते हो या फिर नोएडा स्थित बजरंगी धाम भी आ सकते हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *