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सामुद्रयिक शास्त्र से जाने भविष्य

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अगर किसी व्यक्ति को अपने जन्म का समय, स्थान और तारीख याद नहीं तो इसके बिना भी भविष्य के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है। अगर वो अपने भविष्य के बारे में जानकारी जन्मकुंडली या अंक शास्त्र से जानना चाहे तो वो हासिल नहीं की जा सकती। लेकिन इसका ये अर्थ कभी भी नहीं लगाना चाहिए कि वो अपने भविष्य के बारे में जान नहीं सकता। आईए मैं विनय बजरंगी आपको बताता हूं कि कैसे सामुद्रिक शास्त्र यानि कि हस्त रेखा विधि से जातक की जानकारी सटीकता से दी जा सकती है।

सामुद्रिक शास्त्र की रचना सामुद्र ऋषि के द्वारा करने से इसे सामुद्रिक शास्त्र कहा जाता है। इसे हस्त रेखा या शारीरिक अंग लक्षण विज्ञान कहते हैं। हस्त रेखा द्वारा व्यक्ति के भविष्य की जानकारी की यह विधि अत्यंत प्रामाणिक और वैज्ञानिक भी है। व्यक्ति जब शिशु के रूप में जन्म लेता है तो शिशु होने के कारण उसके हाथ में कुछ एक रेखाएं होती हैं। जिनमें मस्तिष्क, हृदय और भाग्य रेखा ही होती है। जो बहुत ही बारीक और हल्के रंग की होती हैं। पूर्ण और अपूर्ण दोनों तरह की रेखाएं हो सकती हैं। शिशु उम्र के अनुसार जैसे-जैसे कर्म करता है ये रेखाएं मोटी, गहरे रंग की और स्पष्ट रूप में दिखाई देने लगती हैं। कुछ रेखाएं उम्र बीतने पर व्यक्ति के कर्म के अनुसार बदलती रहती हैं। कुछ रेखाएं हट जाती है और कुछ नई आती हैं। ये रेखाएं कुछ समय के लिए अस्थायी ही होती हैं। जो केवल तीन साल का समय दर्शाती हैं।

ऐसा माना जाता है कि दोनों हाथों की रेखाएं एक सामान नहीं होती क्योंकि बायें हाथ की रेखाएं व्यक्ति के पूर्व जन्म की और दायें हाथ की रेखाएं इस जन्म की होती है। हिन्दु धर्म में कर्म को महत्व दिया जाता है। जो व्यक्ति जिस हाथ से काम करता है उसको महत्व दिया जाना चाहिए। जो व्यक्ति आत्मनिर्भर होता है उसका हमेशा दायां हाथ देखना चाहिए। आश्रितों का हमेशा बायां हाथ देखना चाहिए। क्योंकि आत्मनिर्भर व्यक्ति ही कर्मशील होते हैं।

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