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संतान प्राप्ति में आने वाली रूकावटें और उपाय

santaanprapti

श्राप और अपुत्र योग के निर्माण में सहायक ग्रह कौन से हैं जिसके कारण अपुत्र योग की समस्याएं उत्पन्न होती हैं और इसके निवारण के लिए क्या किया जाए आईए इसके बारे में मैं विनय बजरंगी आपको बताता हूं।

सर्पदोष के लिए सूर्य की पूजा, सर्पों के वेद मंत्र से सर्पों की प्रतिष्ठा, गौ-घरसी, सुवर्ण, तिलपात्र का शक्ति अनुसार दान, तंत्र-मंत्र का विधिपूर्वक एक लाख जप करने से सर्पदोष दूर होता है और औलाद की प्राप्ति होती है।

पितृदोष के लिए पितरों का श्राद्ध और अष्टाक्षर मंत्र का सवा सौ करोड़ बार जाप करना चाहिए। स्वर्ण दान और कन्यादान पितृदोष से छुटकारा प्राप्त हो तो संतान प्राप्ति होती है।

मातृदोष के लिए सप्तनीक गंगा स्नान, पांच लाख गायत्री जाप, बछड़ा सहित गौ-दान, हवन कराएं। तिल, चावल, जौ की आहुति, चांदी के पात्र में दूध में अपनी छाया देखें और पांच तोले सोने की मूर्ति डालकर दान करें। ब्राहमणों को भोजन कराएं, दान करें। पूरा एक साल तक पीपल का पूजन करें।

भ्रातृदोष में पीपल और वट वृक्ष की वाटिका का रोपण करें- श्रेष्ठ मार्ग पर जल कूप बनवाएं, प्राजापव्य और चांद्रायण व्रत करें और प्रमुख फलों का दान करें। द्वादशाक्षर मंत्र का जाप कर हवन करके ब्राहमणों को भोजन कराएं।

मातुल दोष के लिए विष्णु पूजन, षोडशक्षर मंत्र का बारह लाख बार जप करें। हवन के बाद ज्योतिष को भोजन कराएं। तालाब, बाग और पुल बनवाना दोष रहित होकर व्यक्ति औलाद प्राप्त करवाता है।

ब्रहमशाप के लिए लक्ष्मी सहित लक्ष्मी जी की पचास पल सोने की मूर्ति बनवाकर, सप्तऋषियों की पूजा करें, गंगा जी के तट और अष्टादश मंत्र का बीस लाख बार जप करें। हवन, ब्राहमणों को भोजन कराएं। बछड़ा सहित गाय दान करें। जातक को अवश्य पुत्र लाभ होगा और ब्रहमश्राप से छुटकारा मिलेगा।

स्त्रीदोष के लिए श्री लक्ष्मी के वस्त्राभरण सहित कन्यादान, सोने की मूर्ति बनाकर बछड़े सहित गौ का दान करें।

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