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बिना जन्म विवरण-जाने भविष्य

future

अगर किसी व्यक्ति को अपने जन्म संबंधी कोई जानकारी नहीं है तो वो कैसे अपने आने वाले भविष्य के बारे में जान सकता है। आईए मैं विनय बजरंगी आपको बताता हूं कि कैसे आप अपने जन्म के बारे में जानकारी न होते हुए भी अपने भविष्य के बारे में जान सकते हो। इसके लिए कई पद्धतियां प्रचलित हैं।जिनका इस्तेमाल प्राचीन काल से ही होता आ रहा है।

आईए सबसे पहले बात करते हैं प्रश्न शास्त्र द्वारा भविष्य कथन की। हमारे में से कई लोग ऐसे हैं जिन्हें अपने जन्म की तारीख के बारे में कुछ भी मालूम नहीं होता। ऐसे में प्रश्न शास्त्र लोगों की मुश्किलों को सुलझाने में मददगार साबित हो सकता है। इस पद्धति में प्रश्न पूछने का माध्यम बनाया जाता है। प्रश्नकालीन लग्न को निकालकर इस पद्धति में जातक विषयक शुभाशुभ फल विवेचन किया जाता है। इसका पता प्रश्न मार्ग में मिलता है जिसमें कहा गया है कि भविष्य फल कथन में उन्हीं शास्त्रीय सिद्धांतों का विचार प्रश्न में भी किया जाना चाहिए। जिनका विचार जातक शास्त्र में किया जाता है। जातक शास्त्र की गणितीय प्रक्रियाएं अत्यधिक लंबी और श्रम साध्या होती हैं, जिनमें बहुत समय लगता है। चाहे ये विंशोतरी महादशा हो अथवा अंतर्दशाएं, प्रत्यंतर दशाएं, षड्वर्ग या अष्टकवर्ग आदि।

प्रश्न शास्त्र में विषय विभाजन के आधार पर अल्प समय ही शुभाशुभ फल विवेचन विभिन्न योगों का सहारा लेकर किया जाता है। प्रश्न के माध्यम से क्रय-विक्रय, खोई या नष्ट वस्तु, सफलता या असफलता, देव दोष ज्ञान, कार्य की सिद्धि असिद्धि, रोग में लंबा होना, रोग के नाश, धन की प्राप्ति या अप्राप्ति, भूमि, आवास, संपत्ति, कृषि कार्यों से लाभ-हानि आदि अनेक तत्कालिक और अहम प्रश्नों के उत्तर आसानी से दिए जा सकते हैं।

केरलीय पद्धति  में प्रश्न के आद्याक्षर के आधार पर प्रश्न फल का विचार किया जाता है। इसके अलावा पृच्छक के द्वारा बताए गए फल या फूल अथवा किसी नदी या देवता के नाम से भी भविष्य फल निकाला जा सकता है।

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