भोजन का ग्रहों पर असर

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राहें अपने आप बनने लगती हैं लेकिन जो लोग बृहस्पति के विरूद्ध जाकर पाप कर्म करते हैं, वो हिंसक प्रवृति के होते हैं। ऐसे लोग मास खाते हैं और मदिरा का सेवन करते हैं। जिसके कारण उनका बृहस्पति भी कोई काम नहीं करता। क्योंकि वो अपनी तामसिकता को छोड़ नहीं पाते। अक्सर कहा भी जाता है जैसा खाईए अन्न वैसा होये मन अर्थात् भोजन का हमारे मन पर बहुत प्रभाव पड़ता है। आहार के अनुसार ही ज्ञान हासिल होता है।

ज्योतिषशास्त्र में शुभ ग्रह कौन से हैं आईए मैं विनय बजरंगी आपको बताता हूं। ज्योतिशास्त्र के अनुसार केंद्र में शुभ ग्रह व तीसरे, छठे और ग्यारहवें घर में पाप ग्रह रहने से व्यक्ति लंबी उम्र, स्वस्थ, सुखी और उन्नतिशील बनता है। क्योंकि केंद्र में शुभ ग्रहों के प्रभाव से व्यक्ति की प्रवृति पूर्ण रूप से सात्विक होती है।

ज्योतिष मानते हैं कि चंद्रमा का जैसा प्रभाव समुद्र पर होता है ठीक उसी तरह का प्रभाव समुद्र पर पड़ता है। अगर चंद्रमा समंद्र में ज्वारभाटे को पैदा कर सकता है तो फिर मानव शरीर को क्यों प्रभावित नहीं कर सकता। बात करे मनुष्य के शरीर की तो उसमें भी 75 प्रतिशत पानी है। चंद्रमा गहरी संवेदनाओं को जागृत करने वाला भी माना गया है। व्यक्ति को अतिसंवेदनशील अवस्था में पहुंचा कर उसकी आंखों में आंसू भर देता है। चंद्रमा की शक्तियों से स्त्रियों का मानसिक धर्म प्रभावित होता है।

ज्योतिष को अगर विज्ञान और कला दोनों ही कह लिया जाए तो कहना जरा भी गलत न होगा। इसमें गणित और खगोल की समझ होना बेहद जरूरी है। कला इसलिए कहा गया है क्योंकि विभिन्न पहलुओं को एक साथ लाने के लिए विश्लेषण आवश्यक है। ऐसा करके आप व्यक्ति के गुण चरित्र और योग्यता के बारे में  पूर्वानुमान लगा सकते हो।

ज्योतिष को फसलों के चक्र की भी व्याख्या करता है। फसलों का चक्र दालों और अनाज की पैदावर रूप में क्रमश : निरंतरा के साथ चलता है। जिसका प्रतिनिधित्व कन्या राशि करती है। कन्या राशि को अनाज की मां के रूप में देखा जाता है। जो धरती का फसलों द्वारा भरण-पोषण करती है। जो हमारे विचारों में नई ऊर्जा और विश्वास पैदा करती है। जो हमें अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करने पर बल देती है।

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