Connect
To Top

संस्कारवान पत्नी प्राप्ति के योग

sanskaarwaanpatni

विवाह एक ऐसा प्यारा सा बंधन हैं जिसके बिना तो गृहस्थ जीवन की गाड़ी चल ही नहीं सकती। हर व्यक्ति की अपनी इच्छाएं होती हैं कि कैसे वो अपने जीवन साथी भावनाओं आकांक्षाओं का ख्याल रखें हम सभी चाहते हैं कि हमारा जीवन साथी हमारी और हमारे विचारों की कद्र करे।इसके लिए मैं विनय बजरंगी आपको योग बताता हूं कि जिससे संस्कारवान और समझदार पत्नी की प्राप्ति कैसे हो।

एक व्यक्ति की कुंडली में कौन-कौन से ग्रहयोग होने जरूरी है कि उसे समझदार, अच्छी और समर्पित पत्नी मिले।

ज्योतिष में सप्तम भाव और सप्तमेश को विवाह का कारक भाव और कारक ग्रह माना गया है। इसके अलावा द्वितीय, पंचम, अष्टम और द्वाद्श भावों तथा शुक्र, मंगल एवं गुरु ग्रहों को विवाह से संबंधित माना गया है।

यदि द्वितीय, सप्तम और द्वादश भावों के स्वामी ग्रह केंद्र या त्रिकोण भावों में हो तथा गुरु से दुष्ट हो तो पत्नी सुंदर, सुशील और पुत्रवती होती है।

अगर पत्नी का कारक ग्रह शुक्र स्वराशिस्थ हो तथा उच्च राशि में हो तो ऐसी स्थिति में ये दोनों ग्रह भी पत्नी प्राप्ति अहम भूमिका निभाते हैं।

आम तौर पर  सप्तम भाव में मंगल शनि युति को विवाह और पत्नी की दृष्टि से शुभ नहीं माना जाता लेकिन यही ग्रह योग सप्तम भाव में यदि मकर राशि में हो तो ऐसे व्यक्ति की पत्नी पतिव्रता, पवित्र, सुंदर और भाग्यवान होती है।

अगर सप्तम भाव में गुरु स्थित हो तो ऐसा व्यक्ति अपनी पत्नी के प्रति पूरी तरह समर्पित और प्रेम करने वाला होता है।

अगर सप्तम भाव में शुभ ग्रह हों अथवा शुक्र सप्तमेश होकर शुभ ग्रह से दुष्ट हो तो व्यक्ति की सुलक्षणा पत्नी मिलती है।

अगर सप्तमेश से दूसरे, सातवें और बारहवें भावों में शुभ ग्रह हों तो व्यक्ति को अच्छी पत्नी, पत्नी सुख और सेहतमंद औलाद की प्राप्ति होती है।

यदि सप्तमेश और गुरु सम राशिगत हो, पंचमेश तथा सप्तमेश अस्त और निर्बल न हो, पंचम भाव में पुत्र कारक ग्रह हों तथा चंद्र लग्न से भी पंचम भाव मे शुभ ग्रह हो तो जातक को सुलक्षणा भार्या और उत्तम औलाद की प्राप्ति होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *